IDA, संपदा शाखा को कोस रहे 4 हजार से ज्यादा भूखंडधारक,लीज नवीनीकरण, फ्री होल्ड जैसे कार्यों में संपदा अधिकारी ने डाला रोड़ा।
IDA संपदा शाखा को कोस रहे 4 हजार से ज्यादा भूखंडधारक,नवीनीकरण,
फ्रीहोल्ड ट्रांसफर जैसे कामों के लिए संपदा अधिकारी ने बना दिए अपने नियम। जबकि कायदे कहते है कुछ और ही।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर
इंदौर विकास प्राधिकरण की संपदा शाखा और संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव सहित उनकी पूरी मंडली को पिछले लंबे समय से इंदौर विकास प्राधिकरण के चार हजार से भी ज्यादा भूखंड धारक कोस रहे हैं। क्योंकि ऐसे भूखंडधारकों के लीज नवीनीकरण,फ्री होल्ड, जैसे अन्य कामकाज नहीं हो रहे हैं। जबकि इस पूरे कामकाज में संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव के अपने खुद के नियम आड़े आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि इसकी गलत जानकारी संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव ने सीईओ डॉक्टर परीक्षित झाड़े तक को गलत दी हैं। लिहाजा इन हालातों में इंदौर विकास प्राधिकरण के भूखंडधारकों एडी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा हैं। लेकिन फिर भी उनके ऐसे काम होना असंभव हो गया हैं।

नियम क्या कहते हैं।

दरअसल इंदौर विकास प्राधिकरण के संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव व्ययन नियम 2018 का हवाला देते हैं। और उन्होंने इंदौर विकास प्राधिकरण सीईओ डॉक्टर परीक्षित झाड़े को भी इसकी अलग ही परिभाषा का हवाला दे दिया हैं। जबकि उक्त नियम के तहत अगर कोई भूखंड धारक आवंटन के चार वर्षों तक उस भूखंड पर निर्माण नहीं करता है तो ऐसी स्थिति में उक्त भूखंड धारक से इंदौर विकास प्राधिकरण कंपाउंडिंग शुल्क लेता हैं। इसके बाद ऐसा भूखंड धारक की लीज नवीनीकरण, फ्री होल्ड जैसी प्रक्रिया किया जाना चाहिए। लेकिन संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव के अपने अलग ही नियम कायदे हैं। जो ऐसे भूखंडधारकों का रोड़ा साबित हो रहा हैं।
या और कुछ वजह,क्योंकि नहीं हो रहा नियमों का पालन।

उक्त भूखंडधारकों के लीज नवीनीकरण, फ्री होल्ड जैसे कार्य नहीं करने के पीछे इंदौर विकास प्राधिकरण के सूत्र ही बताते है कि इसके पीछे संपदा शाखा का सेवा शुल्क आड़े आ जाता हैं। क्योंकि अगर फिर ऐसा भूखंडधारक सेवा शुल्क का वहन कर दे तो उसके लिए नियम शिथिल भी हो जाते हैं। खैर अब इस बात में कितनी सच्चाई हैं लेकिन इंदौर विकास प्राधिकरण के अलग अलग स्कीमों के चार हजार से ज्यादा भूखंडधारक फिलहाल संपदा अधिकारी और पूरी शाखा को दिनभर कोसते नजर आ जाते हैं।