IDA,संपदा शाखा और इंजीनियर की मिलीभगत,नियुक्त सब इंजीनियर की बजाय उसका एवजी करता है स्पॉट विजिट और बन जाती साइट विजिट रिपोर्ट
IDA संपदा शाखा और इंजीनियर की मिलीभगत, साइट रिपोर्ट के लिए तरसती जनता,अधिकृत सब इंजीनियर बजाय स्पॉट विजिट के लिए जाता है,ऐवजी,बिना क्रॉस चेक के हो जाता है सबकुछ काम।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर
इंदौर विकास प्राधिकरण की संपदा शाखा आम जनता के लिए नरक बन गई हैं। ये कोई नई बात नहीं हैं। क्योंकि अब न्यूज विथ तड़का डॉट कॉम के रोजाना खोली जा रही पोल के बाद आम क्या, खास क्या। सभी जान चुके है कि इंदौर विकास प्राधिकरण की संपदा शाखा और उसके प्रभारी मनीष श्रीवास्तव किस तरह से जनता को बिना तेल के ही तल रहे हैं। हालात यह है कि लीज नवीनीकरण कार्य हो या फिर फ्री होल्ड। उसके आवेदन किए हितग्राहियों को तीन महीनों से लेकर सालभर तक गुजर जाता हैं। लेकिन हितग्राही आम जनता की लीज नवीनीकरण,फ्री होल्ड होना बिल्कुल भी मुमकिन नहीं हैं। जो होगा वो संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव के इशारों पर ही होता हैं। अगर निजी खानापूर्ति नहीं की गई तो वो काम होना बिल्कुल भी मुमकिन नहीं हैं। इधर अब संपदा शाखा के साथ इंदौर विकास प्राधिकरण के इंजीनियर की गठजोड़ का भी खुलासा हो रहा हैं। क्योंकि किसी भी लीज नवीनीकरण ,फ्री होल्ड के लिए इंदौर विकास प्राधिकरण ने आईडीए के ही इंजीनियर नियुक्त किए हैं। जो स्पॉट पर जाकर उस संपत्ति का मौका देखते हैं। और फोटोग्राफ भी लेते हुए स्पॉट विजिट रिपोर्ट तैयार करते हैं। लेकिन ऐसा कुछ हो नहीं रहा हैं। बल्कि संपदा शाखा और इंजीनियर की मिलीभगत की वजह से हो कुछ और ही रहा है।
स्पॉट विजिट करने जाता है सब इंजीनियर का एवजी

हम बात कर रहे है साइट विजिट रिपोर्ट की। जिसे लेकर संपदा शाखा ने इंदौर विकास प्राधिकरण के ही सब इंजीनियर को नियुक्त किया हैं। लेकिन इन सब इंजीनियर का पूरा कामकाज यानी स्पॉट पर जाकर रिपोर्ट तैयार करने का काम दैनिक वेतन भोगी या सीधे कहे तो इन सब इंजीनियर ठाकुर सिंह बघेल का एवजी कर रहे हैं। IDA सब इंजीनियर ठाकुर सिंह बघेल को स्कीम 71 का कामकाज दिया गया हैं। लेकिन उनके स्थान पर उनका एवजी सुंदरलाल देख रहा हैं।
सभी स्कीमों में यही हालात

इंदौर विकास प्राधिकरण के नियम अनुसार किसी भी प्रॉपर्टी की लीज नवीनीकरण, फ्री होल्ड करने या फिर अन्य कोई शिकायत होने पर संपदा शाखा द्वारा नियुक्त किया गया सब इंजीनियर स्पॉट विजिट करता हैं। लेकिन इंदौर विकास प्राधिकरण की लगभग सभी स्कीमों में या तो उन सब इंजीनियर का एवजी या फिर इंदौर विकास प्राधिकरण से ही रिटायर हो चुका कर्मचारी स्पॉट विजिट करते हुए रिपोर्ट तैयार कर रहा हैं।
जमकर होता है झोल

स्पॉट विजिट रिपोर्ट तैयार करने ने जमकर झोलबाजी होती हैं। आईडीए के ही विश्वनीय सूत्र बताते है कि स्पॉट विजिट रिपोर्ट तैयार करने के लिए भी एक रेट तय किया गया हैं। लिहाजा यह रेट अनुसार उसकी अदायगी होती हैं उसी के बाद यह स्पॉट विजिट रिपोर्ट की गाड़ी शुरू होती है नहीं तो ये गाड़ी मतलब वो पत्र ida में ही रुका रहता हैं।