महापौर की अफसरशाही पोलखोल मुहिम,विधानसभा क्षेत्रों के पार्षदों का फूट रहा गुस्सा,ऐसा पहला मेयर जो जनता को व्याप्त समस्याओं की बता रहा असल वजह।
मेयर की अफसरशाही पोल खोल मुहिम।
विधानसभावार निगम अधिकारियों की सामने आ रही जादूगरी। काम कुछ हो नहीं रहे मलाई में डूबे अफसर,इसीलिए महापौर पुष्यमित्र भार्गव की नही बैठती पटरी अधिकारियों से।
✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर।
शहर के प्रथम नागरिक महापौर पुष्यमित्र भार्गव को लेकर एक बात बार बार उठड़ी जाती है कि उनकी निगम कमिश्नर हो या फिर अन्य निगम के अधिकारी उनसे पटरी नहीं बैठती हैं। दरअसल अब इसकी मुख्य वजह अधिकारियों की दादागिरी कहे या फिर उनकी हठधर्मिता। जो पोल पट्टी फिलहाल विधानसभा वार पार्षदों से मिल रहे फीडबैक के बाद सामने आ रही हैं। सत्ता पक्ष का पार्षद हो या फिर विपक्ष का निगम अधिकारियों की वजह से त्रस्त हैं। कोई फोन नहीं उठाने तो कोई पार्षद काम समय पर नहीं होने से तंग हैं,इधर इसके अलावा जनता जो पीसा रही हैं। सो अलग। क्योंकि निगम अमले की एक खास बात हैं कि फोन तो उनके उठते नहीं हैं। फिर जनप्रतिनिधि हो या जनता। वह काफी ज्यादा परेशान हैं।
मेयर की अफसरशाही पोल खोल मुहिम,जनता जान रही हकीकत।

इंदौर मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने जिस तरह से सड़क से लेकर बंद कमरे में अधिकारियों को जनता के सामने एक्सपोज किया हैं। उससे यह हकीकत जनता सामने आ रही हैं कि शहर वर्षों से निगम अधिकारियों की वजह से बर्बाद ही हुआ हैं। फिर चाहे अवैध निर्माण कार्य हो या फिर बिना सोची समझी योजनाएं। जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा पानी में बहाना ही साबित हुआ। शहर की सड़के कई बार बनी और खुदी। और फिर बनी। ये पैसों की फिजूल खर्ची। अब जनता के सामने खुले तौर पर सामने आ रही हैं।
विधानसभा क्षेत्रों के पार्षद नाखुश।

मेयर पुष्यमित्र भार्गव स्थानीय विधानसभा क्षेत्र के विधायक और उस विधानसभा क्षेत्रों के पार्षदों के साथ बैठक कर रहे प्रत्येक बैठक में तीस मिनट में प्रति वार्ड जो अधिकारियों की कारगुज़ारिया सामने आ रही हैं। उसे लेकर पार्षदों का गुस्सा जमकर फूट रहा हैं। जबकि निगम अधिकारियों को लेकर जो पोलपट्टी खुल रही हैं। उसे लेकर यह तो तय हो गया है कि शहर के विकास में अधिकारी मुख्य रोड़ा हैं। साथ ही जनता इसका ठीकरा जनप्रतिनिधियों पर फोड़ रही हैं।

ऐसा पहली बार जब प्रथम नागरिक ने लिया ऐसा संज्ञान
नगर निगम में पिछले तीन दशकों से भाजपा परिषद का कब्ज़ा हैं। लेकिन इन में पहले ऐसे महापौर पुष्यमित्र भार्गव हैं, जिन्होंने शहर में चली आ रही समस्याओं को लेकर असल वजह यानी अधिकारियों की लापरवाहियां जनता के सामने खुलेतौर पर रखी हैं।