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उपचार के नाम पर लूट पार्ट TWO,जिस स्वास्थ्य विभाग की सेटिंग! वहीं अमला कर रहा पड़ताल,उठ रही मांग, हो समिति गठित,जो करें सभी खिलाड़ियों की जांच।

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उपचार के नाम पर लूट पार्ट two

जिस स्वास्थ्य विभाग का सांठगांठ वही कर रहा जांच।
उठ रही मांग कलेक्टर बैठाए जांच समिति।

✍️ अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर

शहर के फीनिक्स हॉस्पिटल में आयुष्मान कार्ड योजना के तहत उपचाररत मरीजों से लूट की बातें सामने आने के बाद अब एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि जिस स्वास्थ्य विभाग की पूरी तरह मिलीभगत से आयुष्मान कार्ड धारक के साथ लूट जारी है। दरअसल वहीं स्वास्थ्य विभागीय अमला उक्त मामले की जांच कर रहा हैं। लिहाजा अब इस जांच को लेकर मांग उठाई जा रही है कि इंदौर कलेक्टर इस मामले में खुद संज्ञान लेवे। और एक अलग से जांच समिति गठित करे। जो शहरभर में आयुष्मान कार्ड धारको से हो रही लुट और सरकार को करोड़ों की चपत लगाने वाले इस हद में आ सके।

शिकायत करने से कुछ नहीं होता।

आयुष्मान कार्ड योजना के अंतर्गत नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। जो कि पूरी तरह शहर के हॉस्पिटलों के पक्ष में रहते हैं। यहीं नहीं अगर कोई शिकायतकर्ता शिकायत भी करता हैं तो उसकी शिकायत को लेकर कोई ठोस कार्यवाही होना मुमिकन नहीं हैं।

यह हॉस्पिटल है खिलाड़ी।

 

 

 

आयुष्मान योजना को लेकर शहर का अरविंदो हॉस्पिटल, index हॉस्पिटल, बांबे हॉस्पिटल, जैसे और भी कई निजी बड़े हॉस्पिटल हैं। जो आयुष्मान कार्ड योजना में फर्जीवाड़ा करते आ रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग कार्यवाही के नाम पर मात्र खानापूर्ति करते हुए इतिश्री कर लेता है।

कितनी जांच हो जाए तगड़ी है सेटिंग।

आयुष्मान कार्ड योजना में लगभग हर मामले में जांच तो होती है लेकिन ऐसे हॉस्पिटल संचालकों की स्वास्थ्य विभाग से गहरी गठजोड़ के चलते कार्यवाही होना मुनासिब नहीं हैं।

बड़े बिल का लालच,मरीजों को सजा।

शहर के हॉस्पिटल ऐसे हॉस्पिटल में आयुष्मान कार्ड धारक को मुफ्त में उपचार तो मिल जाता हैं। लेकिन वहीं दूसरी तरफ हॉस्पिटल संचालक बीमारी छोटी हो या बड़ी दोनों ही स्थिति में मरीजों को तंग कर देते हैं। क्योंकि मरीजों को समय पर हॉस्पिटल से डिस्चार्ज तक नहीं किया जाता हैं। ताकि हॉस्पिटल संचालक सरकार से आयुष्मान कार्ड धारक के एवज में मोटी राशि वसूल सके।

दवाईयों में भी जमकर धांधली।

इधर आयुष्मान कार्ड धारक के नाम पर हॉस्पिटल संचालक दवाईयों के नाम पर भी काफी ज्यादा धांधली करते हैं। मरीज को जो समय पर दवाई या अन्य उपकरण की जरूरत होने पर थोक में दवाईयां मंगवा लेते हैं। लेकिन इतनी मात्रा में मरीज को जरूरत नहीं होने पर भी सिर्फ बिल की राशि बढ़ाने के लिए।

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