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MP News: मध्य प्रदेश में किसानों की जमीन पर बसेंगे हाई-टेक शहर, सीएम मोहन यादव करेंगे मुआवजे की बड़ी बरसात

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भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किसानों को खुश करने वाला फैसला लिया है. ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण के बदले मिलने वाले मुआवजे को दोगुना करने की मंजूरी दे दी है. अब किसानों को उनकी जमीन के कलेक्टर गाइडलाइन के मूल्य का अधिकतम चार गुना तक मुआवजा मिल सकेगा. सरकार का मानना है कि इस फैसले से न सिर्फ किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि विकास परियोजनाओं को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है.

किसानों को मिलेगा बड़ा आर्थिक सहारा
मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया. बुधवार को मुख्यमंत्री निवास में आयोजित पत्रकार वार्ता में सीएम डॉ मोहन यादव ने बताया कि, ”सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में मल्टीप्लिकेशन फैक्टर को 1.0 से बढ़ाकर 2.0 कर दिया है. इसका सीधा मतलब है कि अब जमीन अधिग्रहण के बदले मिलने वाला मुआवजा पहले से दोगुना हो जाएगा. इससे किसानों को नई जमीन खरीदने और अपने जीवन को फिर से व्यवस्थित करने में बड़ी राहत मिलेगी.”

विकास और किसान दोनों को मिलेगा फायदा
सरकार का मानना है कि यह फैसला विकास और किसान हितों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. सिंचाई परियोजनाएं. सड़क निर्माण, पुल, रेलवे और बांध जैसी बड़ी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण अब आसान होगा. साथ ही, जिन किसानों की जमीन ली जाएगी, उन्हें उचित और बेहतर मुआवजा मिल सकेगा. इससे परियोजनाओं का क्रियान्वयन तेज होगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.

मुआवजे की राशि में बड़ा उछाल
मुख्यमंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि, ”पिछले तीन वर्षों में 55 हजार से अधिक किसानों को लगभग 16 हजार करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया है. पहले जहां सालाना मुआवजा करीब 5000 करोड़ रुपये था, अब इसे बढ़ाकर लगभग 20 हजार करोड़ रुपये सालाना कर दिया गया है. यह बदलाव सीधे तौर पर किसानों की आय और खर्च क्षमता को प्रभावित करेगा.”

मेट्रोपोलिटन विकास की तैयारी
राज्य सरकार प्रदेश को मेट्रोपोलिटन सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में भी तेजी से काम कर रही है. ऐसे में बड़े स्तर पर भूमि अधिग्रहण की जरूरत पड़ेगी. सरकार का मानना है कि बढ़ा हुआ मुआवजा किसानों के विरोध को कम करेगा और विकास परियोजनाओं को सुचारु रूप से आगे बढ़ाने में मदद करेगा.

7 महीने के मंथन के बाद फैसला
मुख्यमंत्री ने बताया कि, ”यह निर्णय किसी जल्दबाजी में नहीं लिया गया. इसकी प्रक्रिया 7 नवंबर 2025 को शुरू हुई थी, जब एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई थी. इसके बाद 13 जनवरी 2026 को एक मंत्रिमंडलीय समिति का गठन किया गया. इस समिति ने किसान संगठनों. उद्योग संगठनों जैसे फिक्की और क्रेडाई. तथा 400 से अधिक पक्षकारों से चर्चा की. अन्य राज्यों की नीतियों का अध्ययन करने के बाद ही इस बदलाव की सिफारिश की गई.”

किसान समृद्धि की ओर बड़ा कदम
सरकार इस फैसले को किसान कल्याण वर्ष की बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रही है. माना जा रहा है कि इससे किसानों का भरोसा बढ़ेगा. भूमि अधिग्रहण से जुड़े विवाद कम होंगे और प्रदेश में विकास का पहिया तेज गति से घूमेगा.

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