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Surguja University Controversy: संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय में प्रोफेसर भर्ती पर विवाद; छात्र नेता का आरोप—बिना रोस्टर हो रहा फर्जीवाड़ा

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अंबिकापुर/सरगुजा: छत्तीसगढ़ का प्रमुख वनांचल शैक्षणिक केंद्र संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय एक बार फिर गंभीर प्रशासनिक विवादों के घेरे में आ गया है। इस बार का पूरा विवाद विश्वविद्यालय में चल रही प्रोफेसरों की नियमित भर्ती प्रक्रिया (Faculty Recruitment) से जुड़ा हुआ है। स्थानीय छात्र नेता हिमांशू जायसवाल ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर इस भर्ती में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा करने और स्थापित सरकारी नियमों को ताक पर रखने के संगीन आरोप लगाए हैं। हिमांशू जायसवाल का स्पष्ट दावा है कि इस पूरी भर्ती प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ शासन के अनिवार्य रोस्टर नियमों (Roster Rules) का कड़ाई से पालन नहीं किया गया है। इसके साथ ही, नवगठित कार्यपरिषद (Executive Council) की अधिकारिक मंजूरी मिलने से पहले ही आनंद-फानन में भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ खास उम्मीदवारों के नाम चयन के लिए पहले से ही फिक्स हैं और गोपनीय इंटरव्यू पैनल तक की पूरी जानकारी पहले ही लीक होकर बाहर आ चुकी है। हालांकि, यूनिवर्सिटी के कुलपति ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

📋 असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर के 26 नियमित पदों की भर्ती पर उठे सवाल: बिना कार्यपरिषद की मंजूरी के विज्ञापन निकालने का दावा

यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा वर्तमान में असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के कुल 26 महत्वपूर्ण पदों पर नियमित नियुक्ति के लिए प्रक्रिया चलाई जा रही है। छात्र नेता का आरोप है कि इतनी बड़ी और संवेदनशील भर्ती प्रक्रिया में वैधानिक नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि यूनिवर्सिटी की नई कार्यपरिषद का गठन अप्रैल महीने में हुआ था, लेकिन भर्ती के लिए मुख्य विज्ञापन मार्च महीने में ही निकाल दिया गया। इसका सीधा मतलब यह है कि कार्यपरिषद की कानूनी मंजूरी और समीक्षा के बिना ही पूरी प्रक्रिया को बैकडेट या मनमाने तरीके से शुरू कर दिया गया, जो कि पूरी तरह से नियमों के खिलाफ है।

📄 आरटीआई (RTI) में हुआ चौंकाने वाला खुलासा: यूनिवर्सिटी में नहीं है कोई रोस्टर समिति और रोस्टर पंजी

छात्र नेता हिमांशू जायसवाल ने आरटीआई (सूचना का अधिकार) से प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि यूनिवर्सिटी ने खुद लिखित में स्वीकार किया है कि इस प्रोफेसर भर्ती के लिए किसी भी प्रकार की ‘रोस्टर समिति’ का गठन नहीं किया गया था और न ही यूनिवर्सिटी के पास वर्तमान में कोई ‘रोस्टर पंजी’ उपलब्ध है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि आवेदकों द्वारा दर्ज कराई गई दावा-आपत्तियों के निराकरण (Grievance Redressal) की कोई भी प्रामाणिक जानकारी यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड नहीं की गई है। यूनिवर्सिटी प्रशासन इन जानकारियों को सार्वजनिक करने और पारदर्शिता बरतने से लगातार बच रहा है।

“इस महत्वपूर्ण भर्ती में महिलाओं, दिव्यांगों और आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) वर्ग के योग्य उम्मीदवारों के लिए एक भी सीट आरक्षित नहीं की गई है। 1 लाख 31 हजार रुपये से लेकर 2 लाख 17 हजार रुपये तक के भारी पे-स्केल वाली इस नियमित सरकारी भर्ती में आरक्षण नियमों की सरेआम अनदेखी की गई है, जो युवाओं के साथ अन्याय है।”हिमांशू जायसवाल, छात्र नेता

🎯 इंटरव्यू से पहले ही तीन उम्मीदवारों और बाहरी विशेषज्ञों के नाम लीक होने का दावा: सागर, बीएचयू और बुंदेलखंड के प्रोफेसर्स पैनल में शामिल

छात्र नेता हिमांशू जायसवाल ने एक बेहद सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि इस भर्ती में तीन विशेष उम्मीदवारों का चयन पहले से ही तय हो चुका है और इंटरव्यू महज एक औपचारिकता है। उन्होंने जिन नामों का सार्वजनिक रूप से जिक्र किया, उनमें प्रिया राय, संबंध नारायण उपाध्याय और मनोज झारिया शामिल हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने गोपनीयता की धज्जियां उड़ने का दावा करते हुए इंटरव्यू पैनल में शामिल बाहरी विशेषज्ञों (External Experts) के नामों का भी खुलासा कर दिया। उनके मुताबिक, सागर के डॉ. हरी सिंह गौर विश्वविद्यालय से डॉ. हिमांशू पांडेय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से डॉ. रजनीश कुमार और बुंदेलखंड कॉलेज ऑफ लॉ से डॉ. डीपी गुप्ता को इस इंटरव्यू पैनल में शामिल किया गया है, जिसकी जानकारी पहले ही बाहर आ चुकी है।

⚖️ विवाद बढ़ने पर कुलपति डॉ. राजेंद्र लाखपाले ने दी सफाई: कहा—100 पॉइंट रोस्टर का पूरी तरह किया गया है पालन

इस बड़े विवाद के मुख्यधारा में आने के बाद संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजेंद्र लाखपाले ने यूनिवर्सिटी प्रशासन का बचाव करते हुए सफाई दी है। उन्होंने कहा कि प्रोफेसरों की इस पूरी भर्ती में शासन के ‘100 पॉइंट रोस्टर’ (100 Point Roster) का अक्षरशः पालन किया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि रोस्टर को विधिवत लागू किए बिना अलग-अलग आरक्षित वर्गों के लिए पद तय करना तकनीकी और कानूनी रूप से संभव ही नहीं है। कुलपति के मुताबिक, विज्ञापन में दर्शाए गए सभी पद राज्य शासन के मौजूदा नियमों के अनुसार ही पूरी पारदर्शिता के साथ आवंटित किए गए हैं।

“आरटीआई (RTI) में यूनिवर्सिटी के किस विभाग द्वारा क्या जानकारी दी गई है, इसकी मुझे फिलहाल पूरी जानकारी नहीं है। मुझे इस प्रशासनिक त्रुटि की गहन जांच करनी पड़ेगी कि विश्वविद्यालय के संबंधित अधिकारियों ने ऐसा विरोधाभासी जवाब क्यों और किन परिस्थितियों में दिया।”डॉ. राजेंद्र लाखपाले, कुलपति

कुलपति डॉ. लाखपाले ने यह भी स्वीकार किया कि यूनिवर्सिटी के पुराने विज्ञापनों में कुछ तकनीकी कारणों से रोस्टर लागू नहीं हो पाया था, क्योंकि उस समय के नियम और परिस्थितियां अलग थीं। लेकिन अब माननीय न्यायालय के नवीनतम फैसलों और मार्गदर्शिका के बाद कुल स्वीकृत पदों के आधार पर ही रोस्टर को पूरी तरह लागू किया जा रहा है।

🏛️ राजभवन और बिलासपुर हाईकोर्ट तक पहुंचेगा मामला: उम्मीदवारों और पैनल की जानकारी बाहर आने से प्रक्रिया पर गहराया संदेह

Recruitment प्रक्रिया पर उठ रहे इन गंभीर और नीतिगत सवालों के बीच छात्र नेता हिमांशू जायसवाल अब इस पूरे मामले की आधिकारिक शिकायत छत्तीसगढ़ के राजभवन (महामहिम राज्यपाल) में दर्ज कराने और बिलासपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने की अंतिम तैयारी कर रहे हैं। फिलहाल, सरगुजा संभाग के शैक्षणिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है कि अगर यूनिवर्सिटी के पास कोई अधिकृत रोस्टर समिति और रोस्टर पंजी ही मौजूद नहीं थी, तो फिर कुलपति के दावानुसार रोस्टर का सटीक पालन कैसे सुनिश्चित हुआ। इसके साथ ही, इंटरव्यू की तारीखों से पहले ही चयनित होने वाले संभावित उम्मीदवारों और गोपनीय पैनल के विशेषज्ञों की जानकारी का लीक होना पूरी भर्ती प्रक्रिया की शुचिता और विश्वसनीयता पर एक गहरा संदेह खड़ा कर रहा है।

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