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Business Idea: शिलाजीत की खेती नहीं खोज से होती है लाखों की कमाई; जानें कहाँ मिलता है यह ‘काला सोना’?

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हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाने वाला शिलाजीत आजकल कमाई का बड़ा जरिया बनता जा रहा है. इसे आयुर्वेद में बेहद कीमती और औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है. गर्मियों के मौसम में, खासकर मई से जुलाई के बीच, यह पहाड़ों की चट्टानों से निकलता है, इसलिए यही इसका मुख्य सीजन होता है.

बाजार में ऊंची कीमत

शिलाजीत की मांग देश ही नहीं, विदेशों में भी तेजी से बढ़ रही है. शुद्ध शिलाजीत की कीमत बाजार में हजारों से लेकर लाखों रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है. इसकी क्वालिटी और शुद्धता के आधार पर दाम तय होते हैं. यही वजह है कि कई लोग इसे काला सोना भी कहते हैं.

कैसे होता है संग्रह

शिलाजीत को इकट्ठा करना आसान काम नहीं है. यह ऊंचे और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में चट्टानों की दरारों से निकलता है. स्थानीय लोग इसे खास तकनीक से सावधानीपूर्वक निकालते हैं. इसके बाद इसे साफ और प्रोसेस किया जाता है, ताकि इस्तेमाल के लायक बनाया जा सके. रिफाइन करने से पहले शिलाजीत की कीमत 2 से 5 हजार रुपए प्रति किलो के बीच होती है, लेकिन जब इसे रिफाइन कर लिया जाता है तो इसे क्वालिटी के आधार पर 1 लाख रुपए प्रति किलों तक की कीमत पर बेचा जा सकता है.

आयुर्वेद में बढ़ती मांग

आयुर्वेद और हर्बल प्रोडक्ट्स की बढ़ती लोकप्रियता के कारण शिलाजीत की मांग तेजी से बढ़ी है. इसे ताकत बढ़ाने, इम्यूनिटी सुधारने और कई स्वास्थ्य समस्याओं में फायदेमंद माना जाता है. कई कंपनियां इसे कैप्सूल, पाउडर और रेजिन के रूप में बेच रही हैं.

कम निवेश में अच्छा मुनाफा

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर सही तरीके से संग्रह और बिक्री की जाए, तो शिलाजीत से लाखों रुपये तक की कमाई संभव है. खासकर पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों के लिए यह एक अतिरिक्त आय का अच्छा स्रोत बन सकता है.

सावधानी भी जरूरी

हालांकि, शिलाजीत का संग्रह करते समय सुरक्षा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह खतरनाक पहाड़ी इलाकों में मिलता है. साथ ही, मिलावट से बचना और सही क्वालिटी बनाए रखना भी जरूरी है, तभी बाजार में अच्छी कीमत मिलती है. कुल मिलाकर, शिलाजीत न सिर्फ औषधीय गुणों के लिए खास है, बल्कि सही तरीके से काम किया जाए तो यह ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में रोजगार और कमाई का मजबूत जरिया भी बन सकता है.

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