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Hemkund Sahib Yatra 2026: हेमकुंड साहिब यात्रा की तैयारियां शुरू, सेना ने बर्फ हटाना किया शुरू; जानें कब खुलेगा पोर्टल

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उत्तराखंड के चमोली में मौजूद हेमकुंड साहिब यात्रा 20 मई से शुरू होने जा रही है. प्रशासन ने यात्रा की तैयारी शुरू कर दी है. तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए भारतीय सेना यात्रा मार्ग से बर्फ हटाने में जुट गई है. गोबिंद सिंह की तपस्थली के रूप में पहचाना जाने वाला यह स्थल बर्फ से ढकी चोटियों से घिरा हुआ है.

हेमकुंड साहिब यात्रा हर साल जून से अक्टूबर के बीच ही संभव होती है, क्योंकि बाकी समय यह क्षेत्र बर्फ से ढका रहता है. यात्रा की शुरुआत गोविंदघाट से शुरू होती है. यहां से लगभग 19 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा कर श्रद्धालु हेमकुंड साहिब पहुंचते हैं. चमोली का जिला प्रशासन भी यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए अलर्ट मोड पर है. रास्ते में कैंप, मेडिकल सुविधाएं, सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन सिस्टम की निगरानी पर जोर दिया जा रहा है.

कब रवाना होगा पहला जत्था?

परंपरा के अनुसार पंज प्यारे की निगरानी में 20 मई को श्रद्धालुओं का पहला जत्था हेमकुंड साहिब के लिए रवाना होगा. रविवार को गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के प्रेसिडेंट नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने तैयारियों को लेकर सीएम पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की और पहले जत्थे के विदाई समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया.

मुलाकात के दौरान सीएम पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि राज्य सरकार श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं के लिए पूरी तरह तैयार है. उन्होंने कहा, सरकार यात्रा की हर तरह से निगरानी कर रही है. यात्रा के दौरान भक्तों को होने वाली किसी भी परेशानी से निपटने के लिए सरकार हर संभव मदद करेगी.

लगभग 4633 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब हेमकुंड झील के किनारे स्थित है. अधिक ऊंचाई और बर्फ के कारण, यह स्थान केवल गर्मियों में मई से अक्टूबर के बीच खुलता है. इस यात्रा के लिए ऋषिकेश-बद्रीनाथ हाईवे पर गोविंदघाट से होते हुए कठिन पैदल ट्रैकिंग करना पड़ता है.

हेमकुंड साहिब यात्रा का इतिहास

हेमकुंड साहिब का उल्लेख सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह की आत्मकथा बिचित्र नाटक में मिलता है. इस किताब से पता चलता है कि उन्होंने इसी स्थान पर कठोर तपस्या की थी. इसी कारण यह स्थान सिख श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है.

मान्यता है कि इस स्थान की पहचान 20वीं सदी में हुई. 1930 के दशक में संत सोहन सिंह और हवलदार मोहन सिंह ने इस स्थान की खोज की और इसे गुरु गोबिंद सिंह की तपस्थली के रूप में पहचान दी. लगभग 30 वर्ष के बाद 1960 में भारतीय सेना के सहयोग से हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे का निर्माण किया गया.

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