INDORE, पहले से ही अनाथ 88 गेंट्री, अब 70 नयी गेंट्री फिर तैयार, 200 करोड़ का नुकसान,7 सालों से नहीं हुआ टेंडर,विज्ञापनबाजो की चलेंगी मनमानी,सो रहा इंदौर नगर निगम का राजस्व विभाग,प्रभारी से हर सवाल पर एक ही जवाब मुझे कुछ मालूम नहीं,इधर अधिकारी छुपा रहे मुंह।
88 गेंट्री पहले अनाथ और अब 70 नयी गेंट्री फिर हो गई तैयार,7 सालों से नहीं हुआ टेंडर,विज्ञापनबाजो की चलेगी फिर मनमानी,सो रहा इंदौर नगर निगम का राजस्व विभाग,और प्रभारी,हर सवाल पर एक ही जवाब मुझे कुछ मालूम नहीं,इधर अधिकारी छुपा रहे मुंह।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर।
इंदौर शहर में यूनीपोल लॉलीपॉप और अवैध होर्डिंगबाजो को खुद नगर निगम अधिकारियों ने ही खुली छूट दे रखी हैं। क्योंकि एक तरफ इंदौर नगर निगम खजाने को पिछले 7 सालों से राजस्व का चूना लग रहा है जबकि शहर की 88 गेंट्री गेटो और BRTS जो कि निरंजनपुर चौराहे से राजीव गांधी चौराहे तक फैला हुआ हैं वहां का टेंडर पिछले 7 सालों से नहीं हुआ हैं। अब निगम राजस्व विभाग अधिकारियों की इस शिथिल कार्यशैली की वजह से निगम को इतने ही सालों में लगभग 200 करोड़ रुपए राजस्व का घाटा हो गया हैं। वहीं दूसरी तरफ शहर के अवैध होर्डिंगबाज विज्ञापनबाजी से बाज़ नहीं आते हैं। कोई नेता का जन्मदिन हो या धार्मिक आयोजन उसे मौका बनाते हुए इस तरह के अनाथ पड़े इन गेट्री गेटों सहित यहां वहां कहीं भी अवैध विज्ञापन ठोक ही देते हैं। जिसे लेकिन किसी भी इंदौर नगर निगम के जिम्मेदार को परवाह नहीं है कि वह निगम राजस्व को चूना लगाने वालों की रोकथाम करते हुए विधिवत निविदा प्रक्रिया को अंजाम दे दे। जबकि हाल ही में इंदौर महापौर परिषद बैठक में 70 गेंट्री गेटो की स्वीकृति दी हैं। जिसे लेकर अधिकारियों की सुस्त कार्यशैली एक बार फिर अवैध विज्ञापनबाजो को उनकी कारस्तानियां करने के हौसले बढ़ाएगी।

राजस्व समिति प्रभारी का एक ही जवाब मुझे मालूम नहीं।

इंदौर नगर निगम को पिछले 7 सालों में लगभग 200 करोड़ रुपए का राजस्व चूना लग चुका हैं। क्योंकि गेंट्री गेटो और BRTS की निविदा प्रक्रिया को ही अंजाम नहीं दिया गया हैं। जबकि इसके पीछे की वजह अधिकारियों द्वारा एक ही चहेती फर्म को आर्थिक लाभ दिलवाना है। जबकि इस पूरे मामले में जब राजस्व समिति प्रभारी निरंजन सिंह चौहान से कुछ भी सवाल किया जाता है तो उनका हमेशा रटा रटाया जवाब सामने आता है कि उन्हें कुछ भी जानकारी नहीं हैं। हाल ही में मनोज मुंतशिर के आयोजित कार्यक्रम को लेकर भी राजस्व समिति प्रभारी निरंजन सिंह चौहान ने सारेगामा इवेंट कंपनी पर 65 लाख रुपए पिछला मनोरजन कर बकाया होने के दावे किए थे। लेकिन निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने इसे सिरे से खारिज कर दिया था। अब इन हालातों में निगम राजस्व समिति प्रभारी निरंजन सिंह चौहान की जानकारी का आप खुद ही आंकलन कर सकते हैं।

लगातार हो रहा घाटा जिम्मेदार बस सो रहे।

इंदौर नगर निगम राजस्व विभाग अमले की इसी शिथिल कार्यशैली की वजह से निगम खजाने को 200 करोड़ रुपए का घाटा हो चुका हैं। लेकिन अभी भी निगम के जिम्मेदार यह अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे है और इसी समिति के जिम्मेदार निरंजन सिंह चौहान को कोई जानकारी ही नहीं हैं।
