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RTO टू IDA,पूरे कुएं में ही भांग घुली हो तो,उस कुएं से पीने के पानी की अपेक्षा कैसी,संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव के बेमिसाल दस साल,अब जनसुनवाई से आमजनता को मिलेगी मुक्ति या फिर सजा

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RTO टू IDA,,,,
जब पूरे कुएं में ही भांग घुली हों तो,उस कुएं से पानी पीने की अपेक्षा कैसी।
मनीष श्रीवास्तव के इंदौर विकास प्राधिकरण में बेमिसाल दस साल।
जिम्मेदारों ने भी राज्य सरकार,निर्वाचन आयोग से छुपाई जानकारी। तीन से ज्यादा चुनाव हो गए,लेकिन फिर भी नहीं हुआ संपदा अधिकारी का तबादला। अब ऐसे हालातों में कौन नहीं समझ पाएगा कि आखिर इसके पीछे क्या है वजह।
इंदौर विकास प्राधिकरण में जनसुनवाई शुरू,मगर पुरानी शिकायतों की कौन करेगा सुनवाई।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर

RTO टू IDA,
जी हां जिस तरह से इंदौर परिवहन कार्यालय परिसर में गुंडई का नंगा नाच नाचा गया। और सरेआम अधिकारियों,बाबुओं की मौन स्वीकृति के बाद RTO में दो गुटों में चले आ रहे विवाद का शिकार बने दो पत्रकार। जो पिछले दिनों से इंदौर परिवहन कार्यालय में वर्षों से व्याप्त रिश्वत,भ्रष्टाचार,की पोल खोलने में रोजाना लगे हुए थे। कैसे इंदौर परिवहन कार्यालय में पांच रुपए के काम के पांच सौ के काम की सारी तह खोलना शुरू ही की थी कि परिवहन कार्यालय में अधिकारियों बाबुओं की मौजूदगी में उन पत्रकारों पर ऐसा हमला हुआ कि,गुंडई सरेआम खुलेआम,चैलेंज दे रही थी कि उनका कोई कुछ भी बिगाड़ नहीं सकता हैं। क्योंकि नोट की गर्मी के आगे हर कोई पस्त हैं। उसके बाद जो कहानियां बुनी जा रही है। कुछ चंद बदनाम पत्रकारों की वजह से सभी को एक जैसा ठहराने का प्रयास किया जा रहा हैं। खैर साहब गंदगी सभी जगह हैं लेकिन हमारी जमात फिर भी आपसे अच्छी है,क्योंकि आपके पेशे में रुपया ही भगवान है। लेकिन समाजसेवा जीरो। लेकिन हम आप जैसे नहीं।

काली कमाई के लिए जारी गुटबाजी।

RTO में व्याप्त भ्रष्टाचार किसी से छुपा नहीं हैं। यहां शाखाओं की बोली लगती है। वह क्यों,अब यह आपको बताना नईं बात नहीं होगी। क्योंकि सभी जानते है जो जितना देता है। वो उससे दस गुना उसी से कमाता है। खैर बताया जाता है कि इसी काली कमाई के लिए परिवहन कार्यालय के दो गुट पिछले लंबे समय से लड़ रहे है। और अफसर है कि बाहर स्टेडियम में बैठे तमाशा देख रहे है। जिसका कमाई में चौका या छक्का लगे उसके लिए बाहर से बैठकर तालिया बजाते हुए। अपनी जेब भारी भरकम करें जा रहे हैं।

ऐसे हालात इंदौर विकास प्राधिकरण में भी।

दरअसल अब बताया जा रहा है कि इंदौर विकास प्राधिकरण में प्रति मंगलवार जनसुनवाई आयोजित होने वाली हैं। वह इसलिए क्योंकि आम जनता को राहत मिलेगी। लेकिन कैसे? सवाल यही उठ रहा है कि जो अधिकारी वर्षभर,इंदौर विकास प्राधिकरण में बैठने के बावजूद आम जनता को राहत नहीं दे पा रहे हैं। रिश्वतखोरी के उन पर आरोपों की झड़ी हैं। आईडीए की संपदा शाखा हो या अन्य कोई शाखा। वहां हर काम का सबकुछ फिक्स हैं, ऐसे हालातों में कैसे जनसुनवाई सही बैठ पाएगी। क्या अब प्रति मंगलवार आम जनता का सुचारू रूप से कार्य होगा या फिर लीपापोती। जो कि इतने खुलासों के बाद होती ही आ रही है।

संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव के बेमिसाल दस साल।

इंदौर विकास प्राधिकरण के संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव पिछले दस सालों से IDA की संपदा शाखा में जमे हुए है। या फिर इंदौर में ही। लेकिन मनीष श्रीवास्तव को लेकर इंदौर विकास प्राधिकरण के जिम्मेदार तमाम नियम कायदों को भूल गए। या फिर कहे घोलकर पी गए हैं क्योंकि प्रतिनियुक्ति पर इंदौर विकास प्राधिकरण और इंदौर में दस सालों से पदस्थ मनीष श्रीवास्तव को लेकर राज्य सरकार, निर्वाचन आयोग को इंदौर विकास प्राधिकरण के जिम्मेदारों ने सूचना तक देनी जरूरी नहीं समझी। जबकि मनीष श्रीवास्तव के कार्यकाल में तीन से ज्यादा चुनाव सम्पन्न हो गए हैं। लेकिन श्रीवास्तव यहीं मतलब ida और इंदौर में डटे हुए हैं।

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