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RTO में गुंडाई,होती अवैध वसूली,महज 850₹ कुल शुल्क के एवज में ड्राइविंग लाइसेंस के नाम पर वसूले जाते है पांच से दस हजार तक,मिलीभगत की वजह से आमजनता है परेशान

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RTO गुंडागर्दी, वसूली, इसी ड्राइविंग शाखा का कर्ताधर्ता अंकित चिंतामन,वाहन चलाना है तो हो जाओ अवैध वसूली का शिकार,सरकारी फीस मात्र 850₹, लेकिन लाइसेंस बनाने के नाम पर वसूले जाते हैं 5 हजार से भी ज़्यादा।

अधिकारी, बाबू,दलाल, एवजी सबकी मिलीभगत।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर।

इंदौर परिवहन कार्यालय हो या प्रदेश का कोई भी परिवहन कार्यालय जहां ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए अधिकारी,बाबू,एजेंट, एवजी की मिलीभगत के चलते अलग अलग रेट तय किए हुए हैं। दरअसल इधर पूरे प्रदेशभर में किसी भी वाहन चालक को दो पहिया या चार पहिया वाहन चलाने है तो उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस होना जरूरी हैं। नहीं तो पुलिस पकड़ लेती है और बिना ड्राइविंग लाइसेंस पाए जाने पर भारी भरकम आर्थिक जुर्माना ठोकती हैं। लिहाजा इसी से भयभीत वाहन चालक परिवहन विभाग की और रुख करता है। क्योंकि ड्राइविंग लाइसेंस उसे यही से मिल सकता हैं। पुलिस के भय से परेशान वाहन चालक RTO ऑफिस पहुंच तो जाता हैं। लेकिन अब उसे जो ड्राइविंग लाइसेंस की कीमत चुकानी होती हैं। वह अधिकारी,ड्राइविंग लाइसेंस शाखा प्रभारी,RTO का दलाल और बाबू का एवजी तय करता हैं। लगभग उससे दो पहिया का लायसेंस है तो पांच हजार और चार पहिया वाहन चलाने का लायसेंस है तो दस हजार तक भी वसूले जाते हैं। ये सिलसिला 2025 से नहीं बल्कि सालों साल से चला आ रहा है। लेकिन इस अवैध वसूली को रोकने को लेकर आज तक कोई ठोस कदम न उठा न उठाया गया। लिहाजा एक आम आदमी से लायसेंस के नाम पर बेतरतीब वसूली बेखौफ जारी हैं।

ये लगती है सरकारी फ़ीस

किसी भी वाहन चालक को अपना लायसेंस बनवाने के लिए लर्निंग लाइसेंस के लिए आवेदन शुल्क 150₹, टेस्ट शुल्क 300₹ कुल 450₹ सरकार ने तय कर रखे हैं। लेकिन इसी ड्राइविंग लाइसेंस के नाम पर अधिकारी,बाबू,एजेंट,और एवजी की जुगल जोड़ी तीन से चार हजार रुपए तक वसूल लेती हैं। इसी के बाद स्थाई लाइसेंस लेने के वक्त सरकारी फीस 200₹ और स्मार्ट कार्ड फीस 200₹ तय की गई थी। हालांकि अब स्मार्ट कार्ड की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। लिहाजा मात्र 200₹ की फीस का भुगतान करने के बाद वाहन चालक को लाइसेंस मिल जाना चाहिए। लेकिन अगर चार पहिया का लायसेंस है तो उससे ये चौकड़ी दस हजार रुपए तक वसूलती हैं। वहीं दो पहिया के लिए पांच हजार रुपए तक।

इसी शाखा का प्रभारी था अंकित चिंतामन,जिसने की गुंडाई।

हाल ही में पत्रकारों पर जानलेवा हमला करने,लूटपाट,करने और बंधक बनाने के आरोप में घिरा अंकित चिंतामन इसी लायसेंस शाखा का प्रभारी था। जहां बदस्तूर वाहन चालकों से इस तरह की वसूली निरंतर जारी हैं।

परिवहन अधिकारी शर्मा घेरे में।

परिवहन कार्यालय से लायसेंस बनवाने के एवज में वाहन चालकों से कितनी राशि वसूली जाती है। ये अब सभी को पता हैं। लेकिन इस सब में सबसे अहम भूमिका रखने वाले जिला परिवहन अधिकारी प्रदीप शर्मा की भूमिका भी अब छुपी नहीं हैं। क्योंकि बिना कार्यालय के कर्ताधर्ता के अनुमति,जानकारी,मिलीभगत के ये सबकुछ हो पाना संभव ही नहीं हैं।

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