शराब लॉबी की आपसी रंजिश,शराब कारोबारी सूरज रजक पर हमला।

पूर्व से चला आ रहा विवाद,अब सड़को तक पहुंचा।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर
इंदौर के शराब कारोबारी सूरज रजक पर अज्ञात दर्जनभर बदमाशों ने कनाड़िया थाना क्षेत्र में हमला बोल दिया। बताया जा रहा है कि बाइक पर आए अज्ञात बदमाश हथियारों से लैस थे। और इंदौरी शराब कारोबारी सूरज रजक का काम तमाम करने की फ़िराक़ में ही थे। इधर इस हमले के पीछे जो कहानी सामने आ रही है वह शराब कारोबारियों की आपसी रंजिशो और पुराना विवाद बताया जा रहा हैं। दरअसल उक्त पूरे घटनाक्रम को आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया पर हुए लोकायुक्त कार्यवाही के बदले स्वरूप देखा जा रहा हैं। क्योंकि विवाद की जड़ गुजरात में खपाई जा रही अवैध शराब की मिल्कियत से जोड़ा जा रहा हैं। दरअसल इसी वजह से इंदौरी शराब कारोबारी सूरज पर अज्ञात हमलावर ने हमला बोला था। क्योंकि सूत्र बता रहे हैं। गुजरात लाइन में अवैध शराब खपाने को लेकर शराब लॉबी में आपसी जंग छिड़ी हुई हैं। क्योंकि अवैध शराब के गढ़ बन चुके गुजरात में महीने में ही अरबों रुपए की शराब से भारी भरकम मुनाफा होता हैं। जिसकी वजह से फिलहाल शराब कारोबार में आपसी रंजिशो का दौर चल पड़ा हैं। यहीं नहीं बताया तो यहां तक जा रहा है कि यह अभी केवल शुरुआत हैं। क्योंकि इसके बाद भी शराब कारोबार से जुड़े माफियाओं में अब और भी बड़ी गेंगवार होने की संभावनाएं हैं।
राजनीतिक रसूख और शराब की कारोबारी।
सूत्र बताते है कि इंदौरी शराब कारोबारी सूरज रजक भाजपा के एक बड़े गुट से जुड़ा हुआ हैं। और इसी गुट के सहारे रजक ने हाल ही में एक बड़े शराब कारोबारी ए के सिंह के खास और रिश्तेदार बताए जा रहे आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया को लोकायुक्त कार्यवाही कराते हुए रास्ते से हटा दिया हैं। लिहाजा यह हमला उसी के बदले स्वरूप हुआ हैं। क्योंकि सूरज रजक और ए के सिंह जो कि दोनों ही शराब कारोबारी हैं। उनका विवाद बहुत पुराना हैं। यह पहली घटना नहीं हैं, क्योंकि 2024 सहित गुजरात और हाल ही मैं कनाड़िया थाना में पुलिस द्वारा पकड़ाई लाखों की शराब की वजह से रजक और सिंह गुट में तनाव कायम रहा हैं। लिहाजा उक्त तनाव वाले माहौल को देखते हुए भाजपा से जुड़े एक बड़े नेता ने इन दोनों गुटों का समझौता कराने और खुद सूरज रजक ने भी समझौता कराने की कोशिशें की। लेकिन शराब कारोबार में बड़े मगर मच्छ बन चुके सिंह लॉबी इनके प्रस्ताव पर कोई ध्यान नहीं दिया। जबकि जवाबी हमले में रजक गुट ने आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया को लोकायुक्त कार्यवाही में उलझाते हुए उसको रास्ते से हटा दिया।