IDA, 14000 प्रॉपर्टी के आड़े आ रहे नियम, फ्री होल्ड प्रक्रिया बनी चुनौती।

✍️ अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार
इंदौर।
इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा अलग अलग संस्थाओं को अपनी अलग अलग योजनाओं में दिए गए 14 हजार से ज्यादा भूखंड को प्राधिकरण फ्री होल्ड करने में असक्षम हैं। क्योंकि इस पूरी प्रक्रिया में सरकार के ही नियम कायदे आड़े आ रहे हैं। लिहाजा उक्त संपत्तियां ida की होती हुई भी इंदौर विकास प्राधिकरण की नहीं कहलाती हैं। इसलिए इन्हें फ्री होल्ड करने में शासन स्तर की बाधाएं उक्त प्रक्रिया में अड़चन का कार्य कर रही हैं।
क्या कहते है नियम
दरअसल इंदौर विकास प्राधिकरण के बनाए गए नियमों के मुताबिक संस्थाओं को इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा दिए गए भूखंड नो प्रॉफिट नो लॉस पॉलिसी के तहत दिए गए हैं। लिहाजा धारा 8 के अनुसार ऐसे नो प्रॉफिट नो लॉस पॉलिसी वाली केटेगरी के भूखंड को फ्री होल्ड नहीं किया जा सकता हैं। क्योंकि ऐसे भूखंडों से IDA की आय का एकमात्र साधन लीज नवीनीकरण भुगतान राशि से ही होता हैं। लिहाजा IDA इन्हें फ्री होल्ड कर नहीं सकता हैं।
विशेषज्ञों का कहना सिर्फ नियम ही पाबंदी।
इधर इंदौर विकास प्राधिकरण से जुड़े जानकारों का कहना है कि तकनीकी रूप से संस्थाओं को भी IDA ने ही उक्त भूखंड आवंटित किए हैं। अब यह IDA के ही द्वारा आवंटित भूखंड हैं। जिन्हें फ्री होल्ड किया जा सकता हैं। लेकिन नियम इसमें आड़े आते हैं। जिसे लेकर ida की तरफ से भोपाल तक पत्र व्यवहार तक किया जा चुका हैं। फिलहाल इसे लेकर अभी तक भोपाल से कोई स्पष्ट निर्देश प्राधिकरण को प्राप्त नहीं हुए हैं।
जो नियम कहते है उनका पालन ही करते हैं
चर्चा में इंदौर विकास प्राधिकरण मुख्य कार्यपालिक अधिकारी आर पी अहिरवार ने कहा कि हम नियम कायदे के अनुसार ही किसी भी प्रक्रिया को करते हैं। बात रही संस्थाओं के प्लाट या संपत्तियों की तो उन्हें फ्री होल्ड करना आईडीए के बस में नहीं हैं। हम केवल उन्हीं भूखंडों को फ्री होल्ड कर सकते हैं। जिन्हें खुद ida ने लॉटरी,या निविदा के मार्फत विकसित करते हुए विक्रय किया हो। लेकिन संस्थाओं के भूखंडों को हमने नो प्रॉफिट नो लॉस पॉलिसी के तहत संस्थाओं सदस्यों को दिया हैं।