INDORE,सुप्रीम कोर्ट ने BCI के आदेश पर लगाई रोक, वरिष्ठ अधिवक्ता पूर्व न्यायिक अधिकारी नरेंद्र जैन को बड़ी राहत,आजीवन वकालत नहीं करने जा था आदेश, जैन को मिला स्टे।
सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया आदेश पर लगाई रोक,जिसके तहत पूर्व न्यायिक अधिकारी और वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र कुमार जैन की वकालत करने पर सुप्रीम कोर्ट से वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र जैन को मिली राहत, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के ‘लाइफटाइम बैन’ वाले आदेश पर लगा स्टे

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के पूर्व न्यायिक अधिकारी और स्टेट बार काउंसिल के पूर्व सदस्य, वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र कुमार जैन के पक्ष में एक बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के उस आदेश पर रोक (Stay) लगा दी है, जिसमें नरेंद्र जैन को पेशेवर कदाचार का दोषी मानते हुए देश की किसी भी अदालत में वकालत करने से स्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया था।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने की सुनवाई

यह राहत सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ द्वारा याचिका पर सुनवाई के दौरान दी गई। नरेंद्र जैन की तरफ से देश के जाने-माने वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा सीनियर अधिवक्ता पुनीत जैन, वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील कुमार हैं, और इंदौर के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद नायर ने पैरवी की। और मजबूती से उनका पक्ष अदालत के सामने रखा।

क्या था पूरा मामला?

पूर्व में न्यायिक सेवा में रहे नरेंद्र कुमार जैन ने इस्तीफा देकर मध्य प्रदेश राज्य बार काउंसिल के सदस्य के रूप में चुनाव जीता था। हालांकि, उनके खिलाफ न्यायपालिका और जजों पर कथित रूप से बार-बार सार्वजनिक और अनुचित टिप्पणियां व शिकायतें करने के आरोप लगे थे। इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की थी, जिसमें उन्होंने बिना शर्त माफी मांग ली थी। इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने कड़ा कदम उठाते हुए जुलाई 2026 में उनका नाम वकीलों की सूची से हटाने और प्रैक्टिस पर लाइफटाइम बैन लगाने का आदेश जारी कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा की दलीलें

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने पीठ को बताया कि याचिकाकर्ता ने 20 वर्षों तक न्यायिक अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं और उनके परिवार की पृष्ठभूमि भी बेहद सम्मानित रही है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता नरेंद्र जैन (जो कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे) को सख्त लहजे में चेतावनी भी दी। कोर्ट ने तंज कसते हुए पूछा, “मिस्टर जैन, क्या आप अपना रवैया सुधारने के लिए तैयार हैं? ये फर्जी शिकायतें करना बंद करेंगे या नहीं? अपने दोस्तों या तन्खा साहब की शिकायत करेंगे तो ठीक है मजाक में,जी लेकिन बाकी अपने स्थानीय लोगों और जजों के खिलाफ लिखना बंद कीजिए।

आदेश का असर
सुप्रीम कोर्ट द्वारा बार काउंसिल के आदेश पर अंतरिम रोक (Stay) लगाए जाने के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र कुमार जैन को तुरंत बड़ी राहत मिली है और वे अगली सुनवाई व अंतिम फैसले तक अदालतों में अपनी वकालत जारी रख सकेंगे। साथ ही स्टेट बार चुनाव में अब वह सबसे ज्यादा मतों से जीतने वालों में भी बने रहेंगे।
