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Bhoramdev Wildlife Sanctuary: भोरमदेव अभयारण्य में गूंजी बाघों की दहाड़, शावकों के साथ घूमते दिखे बाघ-बाघिन; देखें वायरल तस्वीरें

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कवर्धा: भोरमदेव की पहाड़ियों और सघन जंगलों में एक बार फिर बाघों की दहाड़ गूंजने लगी है. कबीरधाम जिले से जुड़े नेचर प्रेमियों के लिए यह किसी सौगात से कम नहीं है. भोरमदेव अभयारण्य और आसपास के वन क्षेत्रों में बाघ-बाघिन अपने दो शावकों के साथ बेखौफ विचरण कर रहे हैं. वन विभाग द्वारा लगाए गए ट्रैप कैमरों में उनकी स्पष्ट तस्वीरें कैद हुई हैं, जिसने इस बात की पुष्टि कर दी है कि भोरमदेव एक बार फिर बाघों का सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है.

स्वस्थ वन्य पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत

जंगल में बाघों की मौजूदगी सिर्फ एक दृश्य नहीं, बल्कि स्वस्थ वन्य पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है. बाघिन अपने शावकों के साथ शिकार करते हुए देखी गई हैं, जिससे यह साफ है कि जंगल में शिकार प्रजातियों की संख्या संतुलित है और प्राकृतिक चक्र सुचारु रूप से चल रहा है.

कवर्धा के जंगल में घूम रहे कई बाघ बाघिन

वन मंडल अधिकारी निखिल अग्रवाल के अनुसार, वर्तमान में जिले के विभिन्न हिस्सों में लगभग चार से ज्यादा बाघ और बाघिन सक्रिय हैं. हाल के दिनों में बाघों और दो शावक की गतिविधियां कैमरे में कैद हुई है, इसके अलावा तेंदुओं की संख्या भी बढ़ी है. तेंदुआ की तस्वीर भी कैमरे में कैद हुई है. कई स्थानों पर बाघों के पैरों के निशान और मूवमेंट के स्पष्ट संकेत मिले हैं. सुरक्षा कारणों से वन विभाग ने उनकी सटीक लोकेशन सार्वजनिक नहीं की है और लगातार निगरानी बनाए रखी जा रही है.

जानकार बताते हैं, अच्छा संकेत

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे मध्यप्रदेश के कान्हा नेशनल पार्क में बाघों की बढ़ती संख्या एक अहम वजह है. कान्हा में बढ़ते दबाव के कारण कई बाघ-बाघिन सुरक्षित और शांत आवास की तलाश में भोरमदेव जैसे घने और कम व्यवधान वाले जंगलों की ओर रुख कर रहे हैं. पहले भी बाघिनें यहां प्रजनन के लिए आती रही हैं, लेकिन आमतौर पर कुछ समय बाद शावकों को जन्म देने के बाद लौट जाती थीं. इस बार स्थिति अलग है—बाघिन अपने शावकों के साथ लंबे समय से यहां डटी हुई हैं, जो इस क्षेत्र की बढ़ती उपयुक्तता को दर्शाता है.

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा, जल्द शुरू होगी जंगल सफारी

बाघों की बढ़ती मौजूदगी के बीच वन विभाग भोरमदेव अभयारण्य में जंगल सफारी शुरू कर रहा है. विभाग के अनुसार 27 या 28 अप्रैल को भोरमदेव अभ्यारण में सफारी का उद्घाटन किया जाएगा और 1 मई से आम पर्यटकों के लिए सफारी शुरू की जा सकती है. इसके लिए गुजरात की एक अनुभवी कंपनी को ठेका दिया गया है, जो समिति के माध्यम से सफारी संचालन करेगी.

स्थानीय रोजगार को बढ़ावा

सफारी के लिए टिकट की बुकिंग ओनलाइन रहेगी, जंगल सफारी से न केवल पर्यटकों को बाघों के प्राकृतिक आवास को करीब से देखने का अवसर मिलेगा, बल्कि इससे स्थानीय रोजगार और इको-टूरिज्म को भी नई दिशा मिलेगी. कुल मिलाकर, भोरमदेव अभयारण्य में बाघों की वापसी सिर्फ वन विभाग की सफलता नहीं, बल्कि पूरे कबीरधाम जिले के लिए गर्व की बात है. यह संकेत है कि अगर संरक्षण सही दिशा में हो, तो जंगल खुद अपनी शान लौटा लेते हैं.

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