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Bird Watching in Chhattisgarh: पक्षी प्रेमियों के लिए नया हब बना खैरागढ़, डोंगरगढ़ ढारा रिजर्व में मिलीं पक्षियों की 296 प्रजातियां

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खैरागढ़ : छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ और डोंगरगढ़ अब सिर्फ धार्मिक या सामान्य वन क्षेत्र नहीं रहे. बल्कि तेजी से मध्य भारत के प्रमुख बर्ड हॉटस्पॉट के रूप में उभर रहे हैं.यहां पक्षियों और वन्यजीवों की समृद्ध विविधता अब पर्यटन के नए दरवाजे खोल रही है.

खैरागढ़ में 296 पक्षियों की प्रजातियां

छत्तीसगढ़ में कुल 502 पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती है.इनमें 296 प्रजातियां खैरागढ़ और डोंगरगढ़ के जंगलों में दर्ज की गई हैं. सिर्फ एक क्षेत्र में ही आधे से ज्यादा प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज होना इसकी खास अहमियत को दिखाता है. खैरागढ़ और डोंगरगढ़ के घने जंगलों में पक्षियों की चहचहाहट अब वैज्ञानिक तौर पर भी साबित हो चुकी है.

35 स्तनधारी जानवरों की भी पहचान
यही नहीं, सर्वे के दौरान 35 प्रजातियों के स्तनधारी जानवरों की भी पहचान की गई है. जो इस क्षेत्र को जैव विविधता के लिहाज से बेहद समृद्ध बनाता है.इस शोध को इंडियन जर्नल ऑफ नेचुरल साइंसेज में भी प्रकाशित किया गया है.

इस क्षेत्र को इको-टूरिज्म और बर्ड वॉचिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाए, तो यह न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण में मदद करेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा- प्रतीक ठाकुर, पक्षी विज्ञानी

विदेशी पर्यटकों के लिए बन सकता है बड़ा केंद्र
सरकार और पर्यटन विभाग यदि यहां बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर, गाइड, ट्रेल्स और प्रचार-प्रसार पर ध्यान दें, तो खैरागढ़ और डोंगरगढ़ आने वाले समय में देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र बन सकते हैं. खैरागढ़ और डोंगरगढ़ के जंगल अब सिर्फ हरियाली नहीं, बल्कि पर्यटन, शोध और जैव विविधता का खजाना बन चुके हैं.जरूरत है तो बस इसे सही दिशा में आगे बढ़ाने की.

शोध में किनकी भूमिका

डोंगरगढ़ ढारा रिजर्व जैसे वन क्षेत्र भी वन आश्रित प्रजातियों के लिए अहम पाए गए हैं. यह शोध प्रकृति शोध एवं संरक्षण वेलफेयर सोसाइटी डोंगरगढ़ के प्रतीक ठाकुर, कोंडागांव जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अविनाश भोई, पीएचसी मुसराकला, डोंगरगढ़ के एएमओ दिनेश सिन्हा और WWF इंडिया, सेंट्रल इंडिया लैंडस्केप, बिलासपुर के अनुराग विश्वकर्मा द्वारा किया गया है.

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