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UP Police Action: AK-47 को ‘खिलौना’ बताने वाले दरोगा और CO सस्पेंड, आतंकी आकिब को दी थी क्लीन चिट

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Bijnor News: उत्तर प्रदेश में एक तरफ जहां यूपी एटीएस (UPATS) ने लखनऊ को दहलाने की बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर राज्य को बड़े रेल हादसे से बचा लिया, वहीं दूसरी ओर यूपी पुलिस के तंत्र के भीतर एक शर्मनाक लापरवाही का खुलासा हुआ है. बिजनौर पुलिस ने पिछले साल जिस आतंकी नेटवर्क को क्लीन चिट देकर केस बंद कर दिया था, उसी गैंग के गुर्गों ने अब लखनऊ में सिग्नल सिस्टम फेल कर तबाही मचाने की योजना बनाई थी. इस मामले में संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार की हद पार करने वाले बिजनौर के नांगल सोती थानाध्यक्ष सतेंद्र मलिक को सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि नजीबाबाद के सीओ नितेश प्रताप सिंह को पद से हटा दिया गया है.

यूपी एटीएस ने दो दिन पहले एक बड़े ऑपरेशन में मेरठ के साकिब उर्फ डेविल, अरबाब, गौतमबुद्धनगर के विकास उर्फ रौनक और लोकेश उर्फ पपला पंडित को लखनऊ से गिरफ्तार किया. ये चारों संदिग्ध लखनऊ रेलवे स्टेशन पर विस्फोट करने और सिग्नलिंग सिस्टम को ठप कर एक भीषण रेल दुर्घटना को अंजाम देने की फिराक में थे.

पूछताछ में सामने आया कि इस पूरे ऑपरेशन का मास्टरमाइंड दुबई में बैठा मेरठ का आकिब खान है. आकिब ही वह व्यक्ति है जिसने इंस्टाग्राम और टेलीग्राम के जरिए इन लड़कों का संपर्क पाकिस्तानी हैंडलर्स से कराया था. ताज्जुब की बात यह है कि इसी आकिब को बिजनौर पुलिस ने कुछ महीने पहले मासूम बताकर छोड़ दिया था.

बिजनौर पुलिस की वो सेटिंग जिसने सुरक्षा में लगाया सेंध

मामले की जड़ नवंबर 2025 में हुए एक वीडियो कॉल में है. बिजनौर के सौफतपुर निवासी मैजुल, जो साउथ अफ्रीका में सैलून चलाता है, उसका एक वीडियो कॉल वायरल हुआ था. इस कॉल में दुबई में बैठा आकिब खान हाथ में AK-47 और हैंड ग्रेनेड लहराता नजर आ रहा था. बिजनौर पुलिस ने 23 नवंबर 2025 को आकिब और मैजुल के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की थी.

केस की विवेचना नांगल सोती के तत्कालीन थानाध्यक्ष सतेंद्र सिंह मलिक को सौंपी गई. आरोप है कि दारोगा जी ने आरोपियों से सेटिंग कर ली. उन्होंने वीडियो कॉल पर ही आकिब का बयान लिया और अपनी रिपोर्ट में लिखा कि “AK-47 असल में एक प्लास्टिक का खिलौना है और हैंड ग्रेनेड परफ्यूम की एक शीशी है.” पुलिस ने आतंकी नेटवर्क की गहराई मापने के बजाय आरोपियों की बातों पर यकीन किया और फाइनल रिपोर्ट लगाकर केस बंद कर दिया.

ISI कनेक्शन और पाकिस्तान को भेजी वीडियो

जांच में यह भी सामने आया कि इसी आतंकी नेक्सस से जुड़े अबूजर शमीम राईन ने 4 मार्च को बिजनौर के किरतपुर में एक बड़ा कांड किया था. उसने सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए ‘ओम’ और ‘जय माता दी’ लिखे एक वाहन को आग के हवाले कर दिया. उस जलते हुए वाहन का वीडियो बनाकर उसने पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलर्स को भेजा. इस घिनौनी करतूत के बदले दुबई में बैठे आईएसआई (ISI) हैंडलर ने अबूजर के खाते में मात्र पांच हजार रुपये डाले थे.

एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश ने एटीएस के खुलासे के दौरान इसी बिजनौर वाले वीडियो का विशेष जिक्र किया. उन्होंने बताया कि यह वीडियो कॉल इस पूरे गैंग के नेक्सस को पहचानने में सबसे अहम कड़ी थी. इसी वीडियो से कन्फर्म हुआ कि आकिब और मैजुल के साथ तीसरा व्यक्ति मेरठ का साकिब (डेविल) था, जिसे अब एटीएस ने गिरफ्तार किया है.

एसपी की बड़ी कार्रवाई: सीओ और थानेदार पर गिरी गाज

जब लखनऊ में आतंकियों की गिरफ्तारी हुई और बिजनौर पुलिस की पुरानी फाइलों से आकिब का नाम दोबारा जुड़ा, तो मुख्यालय तक हड़कंप मच गया. बिजनौर एसपी अभिषेक झा ने तत्काल प्रभाव से लापरवाही बरतने वाले दारोगा सतेंद्र मलिक को निलंबित कर दिया. वहीं, नजीबाबाद के सीओ नितेश प्रताप सिंह को मॉनिटरिंग में फेल होने के कारण पद से हटा दिया गया है. दोनों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है.

यह मामला यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है. यदि समय रहते बिजनौर पुलिस ने उस AK-47 और वीडियो कॉल की गंभीरता से जांच की होती, तो शायद लखनऊ में होने वाली इस बड़ी साजिश को महीनों पहले ही ध्वस्त किया जा सकता था. फिलहाल, एटीएस गिरफ्तार संदिग्धों से पूछताछ कर रही है ताकि दुबई और पाकिस्तान के बीच फैले इस टेरर नेटवर्क के अन्य प्यादों तक पहुंचा जा सके.

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