प्रदेश में फाइव डे वर्किंग सिस्टम, मुख्यमंत्री,मुख्य सचिव को ठेंगा दिखाते इंदौरी कर्मचारी,अधिकारी, सुबह की बजाय दोपहर में खुलती अमले की नींद
मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव को ठेंगा दिखाते इंदौरी कर्मचारी।
फाइव डे वर्किंग सिस्टम,लेकिन सरकारी अमले की दोपहर 12 बजे बाद खुलती है नींद,IDA,कलेक्टर,RTO, जैसे अहम विभागों के अमले को नहीं है समय का ख्याल।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर
कोरोना काल से मध्यप्रदेश के सरकारी दफ्तरों में हफ्ते में पांच यानी सोमवार से शुक्रवार तक कामकाज करने की शुरुआत हुई थी। जो आज भी जारी हैं। लेकिन हफ्ते में फाइव डे वर्किंग की मिली सरकार की सौगात को सरकारी कर्मचारियों ने मनमाफिक अपने तरीके से कामकाज करने का सिस्टम बना लिया हैं। दरअसल अगर इंदौर विकास प्राधिकरण एकल खिड़की,योजना शाखा,भू अर्जन,और संपदा शाखा की बात की जाए तो यहां के कर्मचारी दोपहर बारह बजे तक कार्यालय पहुंचते हैं। जबकि इस दौरान सुबह 10 से 6 बजे के भरोसे कार्याललीन समय मानकर यहां आने जाने वाली आम जनता घंटों तक परेशान होती रहती हैं। लेकिन इंदौर विकास प्राधिकरण के कर्मचारी दोपहर 12 के पहले देखे नहीं जाते हैं। इसी तरह कलेक्टर कार्यालय स्थित कई विभाग ऐसे है, तहसील कार्यालय ऐसे है जहां पटवारी,तहसीलदार भी लंच टाइम तक कार्यालय में आमद देते नजर आ सकते हैं। लिहाजा इस पूरी अव्यवस्थाओं के बीच यह कहना गलत नहीं होगा कि मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव से लेकर मुख्य सचिव अनुराग जैन के नियम कायदों को ऐसे कर्मचारी ठेंगा बता रहे हैं।
परिवहन कार्यालय में भी यही हालात

इधर नायता मुंडला स्थित इंदौर जिला परिवहन कार्यालय के अलग अलग शाखा प्रभारी और अन्य अमला भी दोपहर बाद ही कार्यालय में नजर आता हैं।
IDA में मनमर्जियां कायम

इसके अलावा इंदौर विकास प्राधिकरण में भी अलग अलग शाखाओं के कर्मचारी दोपहर 12 बजे तो कोई एक बजे कार्यालय पहुंचता हैं। जिसे लेकर कोई नियम कायदे नहीं है न ही कोई जिम्मेदार इसे लेकर सख्त रुख अपनाता हैं।
नियम मुख्यालय नहीं छोड़ने का लेकिन आईडीए में सबकुछ अपने मुताबिक

इंदौर विकास प्राधिकरण के अधिकारी ऐसे है जिन्हें कार आवंटन की पात्रता नहीं हैं लेकिन फिर भी आपसी सेटिंग से उन्हें कार तक मिली हुई हैं। उक्त कार को नियम अनुसार ida की योजनाओं की निगरानी हेतु आवंटित किया गया हैं। लेकिन इन्हीं कार का उपयोग इंदौर मुख्यालय छोड़ते हुए अन्य जिले से रोजाना आने जाने में किया जाता हैं। शाम छह बजते ही उक्त अधिकारी अन्य जिले के लिए इंदौर विकास प्राधिकरण से निकल जाते हैं। उक्त अधिकारी ने बकायदा इंदौर विकास प्राधिकरण के ही एक कर्मचारी को अपना ड्राइवर तक बना लिया हैं जो रोजाना उक्त अधिकारी को लाने ले जाने का काम करता हैं। और कार्यालय में दिनभर टाइम पास के अलावा उसके पास कोई खास कामकाज नहीं हैं।
12 जनवरी से होगी कार्यवाही।

इधर भोपाल के विश्वसनीय सूत्र बताते है कि सरकारी अमले की इस तरह की मनमानियों की जानकारी मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव सहित मुख्य सचिव अनुराग जैन को भी हैं। लिहाजा अब 12 जनवरी से भोपाल से सतत् निगरानी रखी जानी हैं साथ ही अगर सरकारी अमला उक्त फाइव डे वर्किंग सिस्टम का मखौल उड़ाता है तो उक्त व्यवस्थाएं बंद भी की जा सकती हैं।