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राजस्व अमले को कलेक्टर की टाइम लिमिट का भी नहीं है ख्याल,प्रति सोमवार टीएल बैठक साबित हो रही मात्र औपचारिकता।

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टाइम लिमिट में भी राजस्व अमला नहीं करता काम,आमजनता चक्कर काटकर परेशान,कलेक्टर की बैठक  साबित होती मात्र औपचारिकता। 

इंदौर।
कलेक्टर हर सप्ताह टीएल बैठक लेते हैं,जिसमें सभी विभागों की समीक्षा के साथ राजस्व विभाग के प्रकरणों के निपटान संबंधी निर्देश दिए जाते हैं। काम की समीक्षा की जाती है लेकिन आश्चर्य है कि हर सप्ताह बैठक होने के बाद भी कैसे 6 से 8 महीने पुराने प्रकरण लंबित रहते हैं इधर आमजनता फिर भी चक्कर काटती रहती हैं, तो फिर ऐसी टीएल यानी टाइम लिमिट बैठक का औचित्य ही क्या है।

प्रति सोमवार कलेक्टर टीएल बैठक लेकर सभी विभाग प्रमुखों को समय सीमा में कार्य करने के निर्देश देते हैं। बैठक में राजस्व विभाग से तहसीलदार, एसडीएम भी शामिल होते है और उन्हें भी प्रकरणों का समय पर निपटान करने के निर्देश दिए जाते है। ऐसा पहली बार नहीं होता है कि कलेक्टर प्रकरणों को समय सीमा में निराकरण करने के लिए निर्देश दे। यह हर सप्ताह होता है, हर सोमवार को कलेक्टर इसी तरह टीएल बैठक बुलाते हैं,और वही राग गाते हैं कि कम समय पर पूरे काम करें। लेकिन राजस्व अमला कोई काम समय पर पूरा करता ही नहीं है। यह असल हक़ीक़त हैं। सरकार ने सीमांकन, बटाकन और नामांकन जैसे प्रकरणों के लिए 15 दिन और 30 दिन का समय निर्धारित किया है। लेकिन इंदौर की तहसीलों में यह प्रकरण 6 महीने से अधिक समय से लंबित पड़े हैं। कुछ मामलों को तो 8 से 9 महीने हो गए हैं, लेकिन आज तक आवेदनों का निराकरण नहीं हुआ है। आवेदक तहसील कार्यालय के चक्कर लगाकर परेशान होते रहते है। लेकिन उनकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। आवेदन करने के बाद महीनेभर तक पटवारी या आरआई की रिपोर्ट नहीं आती है। उसके बाद कागज तहसील में पड़े रहते हैं।


एक कलाकारी यह भी
जमीनों के सीमांकन और बांटाकन जैसे प्रकरणों के मामले में आवेदन को द्वारा कई महीने चक्कर लगाने और भेंट पूजा के बाद जब काम होता है तो तहसील में पुराने आवेदन पर नकल न देते हुए आवेदक से नया आवेदन करवाया जाता है। जिससे आवेदन और निराकरण की तारीख नजदीक दिखाई देती है। जबकि वास्तव में निराकृत किए गए आवेदन से पूर्व कई महीनो पहले के आवेदन पर चक्कर पर चक्कर लगाने के बाद काम होता है।

आवेदकों की फिक्र

हमारे पास जूनी इंदौर, राऊ और अन्य तहसील के कुछ आवेदकों की जानकारी है। जिनसे हमने बात भी की है। आवेदकों के अनुसार उनके आवेदन मार्च के दौरान किए गए हैं,लेकिन अब तक उनका निराकरण नहीं हुआ। हमारे पास आवेदकों के नाम जमीन का सर्वे और स्थान सहित पूरी जानकारी है, लेकिन हम आवेदकों के नाम व अन्य विवरण और उनकी समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रकाशित नहीं कर रहे हैं।

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