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इंदौर कलेक्टर की समझाइश और सख्ती का उड़ा रहा स्टाफ मज़ाक,नदारद कर्मचारी,परेशान होती आमजनता।

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कलेक्टर कार्यालय के बुरे हालात,पहुंचने वाले परेशान, स्टॉफ नदारद, खाली पड़ा रहता है काउंटर।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर

इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा की कसावट के बावजूद भी कलेक्टर कार्यालय स्थित तहसील कार्यालय हो या,हेल्प डेस्क या फिर पटवारी कक्ष। लगभग सप्ताहभर खाली ही दिखाई देते है। इधर यहां अलग अलग कामों से पहुंचने वाली आम जनता यहां के महीनों चक्कर काटते रहते हैं। जबकि कार्यालय के स्टाफ की वजह से मुखिया यानी कलेक्टर शिवम वर्मा के प्रबंधन पर सवालिया निशान उठते हैं। क्योंकि आम जनता इनसे परेशान होते हुए कोसती रहती हैं।

हेल्प डेस्क पर नहीं मिलते लोग।

 

चर्चा में इनमें से ही मुर्तजा अली ने बताया कि वह महीनों से कलेक्टर कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। हेल्प डेस्क पर उन्हें आधार कार्ड से संबंधित कार्य है। लेकिन वह जब भी आते है, तब स्टाफ कभी सीट पर नहीं मिलता हैं। और मिलता भी तो कभी लंच टाइम तो कभी किसी कार्य का बहाना बनाते हुए काम करने से ही टाल देते हैं।

कलेक्टर की समझाइश सख्ती नाकाम।

इधर इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा तहसीलदारों,पटवारी और अन्य स्टाफ को कामकाज निपटाने के निर्देश देते हैं। लेकिन यही स्टाफ कलेक्टर की सख्ती हो या समझाइश को हवा में फुर्र कर देते हैं।

हमेशा फील्ड का बहाना।

तहसीलदार,पटवारी, और एसडीएम तक को कलेक्टर शिवम वर्मा ने दो दिन फील्ड में रहने के निर्देश दिए हैं। जबकि इन लोगों का हितग्राहियों से हमेशा फील्ड में रहने का ही बहाना इन अधिकारियों द्वारा बनाया जाता हैं। लिहाजा हितग्राहियों के काम निपटने में महीनों लग जाते हैं।

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