इंदौर नगर निगम के ऐसे खिलाड़ियों की वजह से ही खाली हो रहा खजाना, मेयर ने खोली अधिकारियों,ठेकेदार और कंसल्टेंट की जादूगरी की पोल, नईं नवेली सड़क को खोदकर बजट खुटाने का जारी था खेल।
ऐसे खिलाड़ियों की वजह से ही निगम हो रहा हैं
कंगाल,
महापौर ने पकड़ी अधिकारियों,ठेकेदार कंसल्टेंट की जादूगरी, तीन इमली पर चल रहा था बजट लुटाने का खेल,सड़क बनाई,फिर खोदी और फिर सड़क बनाने का जम रहा था मामला,मेयर ने अधिकारियों,ठेकेदार कंसल्टेंट को लगाई फटकार।
✍️ अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर।
इंदौर नगर निगम अधिकारियों,ठेकेदार और कंसल्टेंट की मिलीभगत से ही नगर निगम का खजाना खाली होता जा रहा है। और इन माली हालातों की वजह से ही नगर निगम पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा हैं। दरअसल नगर निगम जनकार्य विभाग अधिकारियों की जादूगरी जारी हैं। और निगम कमिश्नर हो या अपर आयुक्त जैसे अधिकारी ऐसे खेलो के बावजूद चुप्पी साधे रहते हैं। एक तरफ जहां नगर निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव से लेकर महापौर पुष्यमित्र भार्गव निगम राजस्व को बढ़ाने की हर संभव कोशिशें कर रहे हैं। लेकिन निगम अधिकारियों की कमान संभाल रहे निगमायुक्त उन्हीं के अमले की जादूगरियों से अनभिज्ञ हैं। इधर अब इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने ऐसे खिलाड़ियों के खेलो को रंगेहाथों पकड़ने की मुहिम शुरू कर दी हैं। लिहाजा इसी के चलते मेयर पुष्यमित्र भार्गव को तीन इमली चौराहे पर चल रहे अधिकारियों,ठेकेदार,और कंसल्टेंट के निगम खज़ाने को खाली करने की साजिश का भंडाफोड़ कर दिया। दरअसल तीन इमली चौराहे को लेकर मेयर को वीडियो मिला था। जिसमें नई नवेली बनाई जा रही सड़क को दोबारा स्टॉर्म वॉटर लाइन के नाम खोदा जा रहा था। ताकि निगम खज़ाने को खाली किया जा सके। लेकिन महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने यहां पहुंचकर निगम अधिकारियों, ठेकेदार और कंसल्टेंट की इस जादूगरी की पोल खोल दी। मेयर ने अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर,जोनल अधिकारी अतीक खान सहित ठेकेदार और कंसल्टेंट एजेंसी एस एन एस को फटकार लगाई। और बनी बनाई सड़क को स्टॉर्म वॉटर लाइन के नाम पर दोबारा खोदने पर आर्थिक जुर्माना,ब्लैक लिस्टेड करने तक की कार्यवाही की बात कहीं।

ये खेल अब नहीं चलेगा।
चर्चा में मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि स्पष्ट नजर आ रहा है कि अधिकारी पैसों की बेफिजूल बरबादी कर रहे हैं। एक तरफ निगम आर्थिक संकटों से गुजर रहा हैं। राजस्व बढ़ाने की दिन रात मेहनत और कोशिशें कर रहा हैं। लेकिन वहीं दूसरी तरफ सड़के बनाने के बाद फिर खोदी जा रही हैं। जो कि घोर लापरवाही बड़ी साजिश हैं। क्योंकि निर्माण शुरू करने से पहले अधिकारी,ठेकेदार कंसल्टेंट इसे लेकर कोई भी अध्ययन नहीं करते हैं। या तो वह जानबूझकर करते हैं या फिर उन्हें भविष्य को लेकर कोई ज्ञान ही नहीं हैं।