नियमकायदों को ताक पर रख वैभव देवलासे की नगर निगम में वापसी,MIC बैठक में भी आई उपयंत्री की बहाली पर आपत्ति।
मामला विवादित उपयंत्री वैभव देवलासे की वापसी का,MIC में भी आई आपत्ति,कैसे बिना सजा,45 दिवस की अवधि के पहले कर दिया गया बहाल।
सूत्र बताते है, कमिश्नर के पीए रघुवंशी ने जमाया खेल और संघ नेताओं के वरद हस्त के चलते हुई बहाली।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर
चंदन नगर नामकरण मामले में निलंबित हुए यातायात विभाग उपयंत्री और चार मलाईदार जोनलो के भवन अधिकारी वैभव देवलासे की नगर निगम में वापसी को लेकर महापौर परिषद बैठक में भी आपत्ति आई हैं। दरअसल नियम कहते है कि इतने गंभीर मुद्दे और सरकार विरोधी काम करने वाला कोई भी कर्मचारी निलंबन के 45 दिनों तक तो किसी भी स्थिति में बहाल नहीं किया जा सकता हैं। लेकिन फिर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव ने चलती जांच के बीच वैभव देवलासे को बहाल कर तो दिया साथ ही साथ चार प्रमुख ज़ोनल कार्यालयों का भवन अधिकारी तक देवलासे को नियुक्त कर दिया। लिहाजा अब विवादित उपयंत्री वैभव देवलासे की इंदौर नगर निगम में वापसी को लेकर दो बातें प्रमुख रूप से सामने आ रही हैं। जिसमें इंदौर नगर निगम आयुक्त के पीए रघुवंशी की भूमिका संदेहास्पद बताई जा रही है। तो कुछ निगम से ही जुड़े विश्वनीय सूत्र बताते है कि वैभव देवलासे संघ यानी RSS के नेताओं से गहरी मित्रता रखते हैं। लिहाजा उनके ही फोन पर देवलासे को बहाल कर दिया गया हैं।
नियम कायदे सबकुछ ताक पर।

इधर कानून के जानकार बताते है कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को गम्भीर मुद्दे के चलते निलंबित किया जाता है तो उसकी वापसी मतलब बहाली 45 दिन के बाद ही होती है। लेकिन वैभव देवलासे को जो वरद हस्त प्राप्त है उसके चलते निगम आयुक्त महोदय ने नियम कायदे सभी को ताक पर रखते हुए देवलासे को सम्मानजनक तरीके से बहाल तक कर दिया। लेकिन जिम्मेदार देखते रह गए।