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चंदन नगर नामकरण मामला,मेयर की किरकिरी,वैभव देवलासे सहित अन्य की वापसी,कई गलतियों के बाद एक और गलती माफ़,क्योंकि नगर निगम के पास कर्मचारी नहीं।

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चंदन नगर नामकरण मामला,कार्यवाही भी, महापौर की बात हुई हवा,और वैभव देवलासे को मिल गए चार जोनल कार्यालयों का प्रभार क्योंकि अमला नहीं। कई गलतियों के साथ एक और गलती माफ़ क्यों?

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर

नगर निगम इंदौर में कोई घोटाला,मामला,मुद्दा,या भ्रष्टाचार ही क्यों न हो। उठता तो बड़े जोरशोर,उम्मीदों,और दावों के साथ तो होता हैं। लेकिन आखिर में फुस्स हो जाता हैं।

दरअसल चंदन नगर नामकरण मामले में खुद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बातें,कार्यवाही के दावे तो बड़े बड़े कर दिए थे। लेकिन अंततः हुआ वहीं जो रची राखा। क्योंकि मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने चंदन नगर नामकरण मामले में जिस तरह से दहाड़ भरी थी और दोषियों पर FIR तक की बात कहीं थी। उस मामले में निलंबित उपयंत्री जो कि होते हुए कार्यपालन यंत्री का इंदौर नगर निगम में प्रभार देख रहे थे। उन महानुभाव अधिकारी वैभव देवलासे को निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव ने बहाल कर दिया हैं। नगर निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव के जारी आदेश में फिर एक सजा माफ कर दी गई हैं। उसके पीछे कारण बताया गया हैं देश के सबसे स्वच्छ नगर निगम में अमले की कमी। और वैभव देवलासे का माफीनामा। खैर नगर निगम के इतिहास में तमाम दावों के बाद एक बार फिर एक गलती माफ़ कर दी गई। जबकि उक्त पूरे मामले में एक कर्मचारी की राम गुप्ता की बलि चढ़ते हुए पूरा मामला रफा दफा हो गया हैं।

पूर्व विधायक मंत्री पुत्र ने गरमाया मुद्दा,महापौर भी हुए थे प्रखर।

चंदन नगर नामकरण मामले को पूर्व विधायक और नगरीय प्रशासन मंत्री स्थानीय विधानसभा क्षेत्र विधायक कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय ने पत्र लिखते हुए गर्मा दिया था। लिहाजा फरवरी 2025 से दबाए जा रहे चंदन नगर नामकरण मामले ने जोर पकड़ लिया था । जबकि उक्त मामले में अपर आयुक्त नरेंद्रनाथ पांडे तक तो इस मामले की जांच की आंच तक नहीं पहुंची थी। लेकिन अब अन्य बलि के बकरे बनाए गए अन्य निगम अधिकारी बहाल होते जा रहे हैं। जबकि इन में से एक राम गुप्ता अदने कर्मचारी की सेवा समाप्त करते हुए बलि चढ़ चुकी हैं।

माफीनामा और मिला भरपेट ईनाम।

  • निगमायुक्त जारी द्वारा बहाली आदेश में नगर निगम के पास पर्याप्त अमला न होना, और खुद वैभव देवलासे द्वारा उचित जवाब देने,यानी माफीनामे का हवाला दिया गया हैं। जबकि उक्त आदेश के बाद अब यह सवाल उठ रहे है कि क्या नगरीय प्रशासन में अब उपयुक्त और योग्य इंजीनियर नहीं शेष रहे जो सरकार विरोधी गतिविधि तक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव द्वारा बात कहने के बावजूद देवलासे वापस आ गए। यहीं नहीं ईनाम के तौर पर दोबारा उन्हें चार चार जोनल कार्यालयों की जिम्मेदारी तक दे दी गई हैं।
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