मोहन सरकार बदनाम हो रही है और इंदौरी जनप्रतिनिधि चुप, केवल मेयर को छोड़,दो मंत्री बाकी विधायकों कानों में डाली रूई।

✍️ अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर
सराफा चौपाटी मामला हो या फिर शहर में निर्माण कार्यों की वजह से बदहाल सड़कें, गड्ढे और इस वजह से मोहन सरकार तक बदनाम हो रही हैं। लेकिन सरकार के ही दो कैबिनेट मंत्री, बाकी विधायकों ने ऐसे मामले पर चुप्पी साध ली हैं। तो

इधर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने जरूर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है कि नगर निगम के अलावा अन्य जो निर्माण एजेंसियां हैं। उनके कार्यों की वजह से शहर की दुर्गति हो रही हैं। जबकि यह निर्माण एजेंसियों जिनमें PWD, एम पी आई डी सी, और IDA, जैसी अन्य एजेंसियों ने ब्रिज निर्माण शुरू किए महीनों कर दिए हैं। लेकिन इस कछुआ गति से चल रहे कार्यों के कारण शहरवासी परेशान हो रहे हैं। जबकि हर समस्या को लेकर शहरवासी इंदौर नगर निगम को कोस रहा हैं। मगर यह उचित नहीं हैं।
दो मंत्री, दोनों ने साधा मौन।

मोहन सरकार ने शहर को दो मंत्री नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट को कैबिनेट में स्थान दिया हैं। लेकिन शहर के इस बड़े मुद्दे को लेकर दोनों ही मंत्रियों ने मौन साध रखा हैं। जैसे सराफा चौपाटी मामले में भी उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी।
NHAI भी कुछ नहीं।

NHAI जो कि राष्ट्रीय राजमार्गो का निर्माण करवाती हैं। यह NHAI अधिकारी और ठेकेदारों की गहरी यारियो का खामियाजा जनता उठा रही हैं। क्योंकि जिस तरह से बायपास की सर्विस रोड, बोगदो का निर्माण किया गया हैं। उसकी वजह से जनता इन गलतियों की सजा भुगत रही हैं।
मैने अपनी जिम्मेदारी निभाई क्योंकि नगर निगम बदनाम हो रहा हैं।

इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव कहते है कि जिस तरह से अन्य निर्माण एजेंसियों की कार्यशैली हैं। उसे लेकर मेरे द्वारा पत्र लिखना जरूरी हो गया था। क्योंकि यह नगर निगम से पृथक विभाग हैं। जबकि इनकी गलतियों का खामियाजा नगर निगम भुगत रहा है कोई भी भूल चुक कि स्थिति में जनता नगर निगम को कोस रही हैं। सीएस को पत्र लिखने के बाद भी कुछ ठोस कार्यवाही नहीं होती है तो फिर मैं खुद सीधे मुख्यमंत्री से इस मामले में बात करूंगा।