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सराफा चौपाटी,जांच समिति की रिपोर्ट को पेश किया जा रहा तोड़मरोड़कर,पारंपरिक दुकानों की बजाय फास्ट फूड से हैं,समिति सदस्यों को ऐतराज़।

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सराफा चौपाटी मामला,निगम जांच समिति रिपोर्ट को घुमा फिराकर किया जा रहा पेश,पारंपरिक दुकानों पर जांच समिति को भी नहीं कोई पेंच।
फास्ट फूड दुकानों पर समिति सदस्यों को थी आपत्ति।

✍️ अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर

शहर की पारंपरिक सौगात सराफा चौपाटी मामले को लेकर आम जनता को काफी ज्यादा भ्रमित किया जा रहा है, निगम जांच समिति जो कि 27 फरवरी 2024 को बनाई गई थी। उसे लेकर बताया जा रहा है कि समिति ने सराफा चौपाटी की पारंपरिक दुकानों को शिफ्ट करने की दलील दी थी। जबकि जांच समिति सदस्यों जिनमें MIC सदस्य राजेंद्र राठौड़,निरंजन सिंह चौहान,अश्विनी शुक्ला और राकेश जैन थे। उन्होंने सराफा चौपाटी को लेकर 200 से ज्यादा दुकानों को लेकर सुरक्षा,पार्किंग और व्यवस्थाओं को लेकर राय दी थी कि सराफा चौपाटी में पारंपरिक दुकानों के अलावा अन्य फास्ट फूड दुकानों को हटाया जाएं। क्योंकि यह दुकानें आम शहरवासी के स्वास्थ्य के लिए भी उचित नहीं हैं। और इनकी वजह से सराफा चौपाटी का मूलस्वरूप बिगड़ गया हैं। लिहाजा समिति सदस्यों ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव से पारंपरिक दुकानों को छोड़ अन्य दुकानों को हटाने की बात कहीं थी।

रिपोर्ट तोड़ मरोड़ दी।

27 फरवरी 2024 को सराफा चौपाटी को लेकर बनाई गई समिति को सराफा चौपाटी की पारंपरिक दुकानों को छोड़ अन्य दुकानों की व्यवस्थाओं और दुष्परिणामों को ध्यानाकर्षण हेतु बनाया गया था।

दोनों ही शहर की पहचान।

सराफा चौपाटी और सराफा बाजार दोनों ही शहर की देशभर में सांस्कृतिक धरोहर मानी जाती हैं। जिसे लेकर नगर निगम उचित इंतजाम और व्यवस्थाएं कर रहा हैं।

नगर निगम संवारने के मूड में,देगा सुविधाएं।

दरअसल नगर निगम द्वारा उक्त समिति का गठन ही इसलिए किया गया था। ताकि पारंपरिक दुकानों को छोड़ अन्य दुकानों को हटाया जाए। ताकि इंदौर की सांस्कृतिक धरोहर कायम रहे। लेकिन अब अन्य दुकानों को हटाने के बाद ऐसे कथित लोगों ने इसे बेवजह का मुद्दा बना दिया हैं।

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