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नगर निगम द्वारा जमींदोज खण्डर,उगल रहा भवन अधिकारी असित खरे का नाम,योजना समिति प्रभारी उदावत ने की कार्यवाही की मांग

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नगर निगम द्वारा जमींदोज खण्डर उगल रहा भवन अधिकारी अशित खरे का नाम

MIC सदस्य योजना प्रभारी राजेश उदावत ने आयुक्त से की जांच की मांग।

इंदौर।

पिछले दिनों नगर निगम रिमूवल अमले ने विस्फोटक के जरिए नाले किनारे बने स्कीम 54 पीयू 4 प्लाट नंबर 234 पर बने अवैध निर्माण को जमींदोज किया था। उक्त भवन निर्माता ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों को धत्ता बताते हुए उक्त निर्माण कर डाला था। दरअसल अब उक्त पूरी नगर निगम की कहानी में निगम द्वारा जमींदोज किया गया उक्त निर्माण ही भवन अधिकारी असित खरे का नाम बार बार उगल रहा हैं क्योंकि भवन अधिकारी रहते हुए खरे ने NGT के तमाम नियम कायदों को ताक में रखते हुए 2021 में उक्त पीयू 4 स्कीम 54 स्थित प्लाट नंबर 234 का नक्शा पास कर दिया था। जो कि NGT के नियमों के सीधे उल्टा है। लिहाजा इसी वजह से नगर निगम रिमूवल अमले ने कमिश्नर शिवम वर्मा के निर्देशों का पालन करते हुए उक्त निर्माण ध्वस्त कर दिया। लेकिन अब उक्त खण्डर बन चुका यह निर्माण जोनल क्रमांक 22 के भवन अधिकारी असित खरे का नाम बार बार उगल रहा है। और भवन अधिकारी असित खरे पर सख्त कार्यवाही किए जाने की भी मांग कर रहा है। हालांकि अब उक्त पूरे में इंदौर नगर निगम योजना प्रभारी राजेश उदावत ने जरूर संज्ञान लेते हुए नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और इंदौर नगर निगम आयुक्त शिवम वर्मा से असित खरे पर ठोस कार्रवाई किए जाने की मांग उठाई है। चर्चा में निगम योजना प्रभारी राजेश उदावत ने भी कहा कि जब निगम अधिकारी ही इस तरह की चूक करेंगे या जानबूझकर नियमों को ठेंगा बताएंगे तो उन ऐसे अधिकारियों पर भी ठोस कार्यवाही की जानी चाहिए। ताकि आगे तो कोई भी निगम अधिकारी ऐसे लापरवाहियां न करें। और किसी सांठगांठ में शामिल न हो सके।

यह कैसी अंधेर गर्दी खरे को ही वापस बनाया भवन अधिकारी

दरअसल पीयू 4 स्कीम 54 स्थित प्लाट नंबर 234 असित खरे की मिलीभगत की कहानी खुद ब खुद बयान कर रहा है। लेकिन अंधेर गर्दी तो देखिए कि असित खरे को वापस जोनल क्रमांक 22 का भवन अधिकारी बनाकर बैठा दिया गया।

अनुमति भी खत्म हो गई थी,फिर कैसे बेख़ौफ़ निर्माण

दरअसल उक्त प्लाट नंबर 234 का नक्शा भवन अधिकारी रहते हुए असित खरे ने 2021 में स्वीकृत किया था। जिसकी वैधता 2024 ही थी। लेकिन फिर भी उक्त प्लाट पर बिना रिन्यू किए बेखौफ निर्माण जारी था। जिसे लेकर भी नगर निगम अधिकारियों पर उंगलियां उठ रही है। 

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