Local & National News in Hindi
Logo
ब्रेकिंग
INDORE कांग्रेसी नौटंकीबाज,पानी के लिए मात्र जनता के सामने कर रहे नौटंकी,मेयर की जनता से अपील खुद पू... Panna News: अजयगढ़ में कुआं धंसने से बड़ा हादसा; मलबे में दबे 5 मजदूरों की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी Indore Municipal Corporation News: सड़कों के चौड़ीकरण में तोड़े जा रहे मकानों पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला... Marriage Fraud in Dewas: अनाथ आश्रम की लड़कियों से शादी का झांसा देकर वसूले लाखों, 42 दूल्हे पहुंचे त... Kerala Politics: मुख्यमंत्री सतीशन और पीएम मोदी की बैठक; राज्य की प्राथमिकताओं और केंद्र से मदद पर र... Supreme Court Update: कानून के छात्रों की उपस्थिति पर SC का बड़ा फैसला; हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक Gurmeet Ram Rahim Parole: 16वीं बार जेल से बाहर आए गुरमीत राम रहीम; 30 दिन की पैरोल पर मचा सियासी बव... Amit Shah in Rajasthan: सीमा सुरक्षा हमारी प्राथमिकता; BSF जवानों के साहस और बलिदान को गृह मंत्री ने... Akhilesh Yadav Press Conference: यूपी में 'फर्जी एनकाउंटर' को लेकर अखिलेश यादव का बीजेपी पर बड़ा हमला Khagaria Encounter: बिहार एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई; 50 हजार का इनामी कुख्यात अपराधी मोहम्मद बुद्दिन ढे...

Twisha Sharma Case: भोपाल के ट्विशा मौत मामले में CBI की बड़ी कार्रवाई; पति और पूर्व जज सास पर दर्ज हुई FIR

3

भोपाल: भोपाल के बहुचर्चित और रहस्यमयी ट्विशा शर्मा मौत मामले में अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अपनी कार्रवाई का शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जैसे ही मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई के हाथों में आया, टीम ने बिना देरी किए मृतका के पति समर्थ सिंह और उनकी सास, जो कि एक पूर्व जिला न्यायाधीश (District Judge) रह चुकी हैं, के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। दिल्ली से भोपाल पहुंची सीबीआई की स्पेशल क्राइम यूनिट ने मामले से जुड़े तमाम दस्तावेजों और सबूतों को जुटाना शुरू कर दिया है। सीबीआई की इस तेज एंट्री ने मामले में एक नई उम्मीद जगाई है, जबकि दूसरी ओर भोपाल पुलिस की लचर कार्यप्रणाली, जांच में बरती गई ढिलाई और घोर लापरवाही एक बार फिर सार्वजनिक रूप से उजागर हो गई है।

🔍 भोपाल पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल: एम्स की टीम को वो ‘बेल्ट’ तक नहीं दिखा सकी पुलिस, जिसे बताया गया था मौत का जरिया

सीबीआई जांच से पहले स्थानीय पुलिस की भूमिका लगातार सवालों के घेरे में रही है। सूत्रों के मुताबिक, जब ट्विशा का दोबारा पोस्टमार्टम करने के लिए दिल्ली एम्स (AIIMS) की विशेषज्ञ टीम भोपाल पहुंची, तो स्थानीय पुलिस टीम उनके सामने उस बेल्ट को तक पेश करने में विफल रही, जिससे फंदा लगाकर आत्महत्या करने का दावा ससुराल पक्ष द्वारा किया गया था। पुलिस ने एम्स की टीम को यह अजीबोगरीब तर्क देकर टालने की कोशिश की कि आत्महत्या में इस्तेमाल हुई बेल्ट फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री (FSL) के पास जमा है। अब इस खुलासे के बाद पुलिस खुद एफएसएल टीम को पत्र लिखकर जवाब मांग रही है, जिससे जांच में हुई देरी और पुलिस की संवेदनहीनता साफ झलकती है।

⏳ 13 दिन बाद पुलिस ने किया स्पॉट वेरिफिकेशन: सबूत जुटाने में बरती गई भारी ढिलाई, मौका-ए-वारदात पर ढुलमुल रवैया

इतना ही नहीं, इस हाई-प्रोफाइल घटना के पूरे 13 दिन बीत जाने के बाद सोमवार को जाकर पुलिस की टीम ने आखिरकार घटना स्थल (ससुराल) का स्पॉट वेरिफिकेशन किया। करीब दो घंटे तक मृतका के ससुराल में रुकी पुलिस टीम ने जांच के लिए मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल सबूतों को अपने कब्जे में लिया है। शुरुआत से ही इस संवेदनशील मामले में स्थानीय पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में रही है। इतने गंभीर मामले में भी सबूतों को सुरक्षित रखने और मौका-ए-वारदात की समय पर वैज्ञानिक जांच करने में पुलिस ने जिस तरह की भारी ढिलाई बरती, वह कई बड़े सवाल खड़े करती है।

⚖️ क्या है 33 वर्षीय ट्विशा की मौत का रहस्य? मायके पक्ष का दहेज प्रताड़ना का आरोप, जबकि ससुराल पक्ष ने दी ड्रग्स की दलील

गौरतलब है कि 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा का शव बीती 12 मई को भोपाल के पॉश कटारा हिल्स इलाके में स्थित उनके ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटका मिला था। मायके पक्ष ने ससुराल वालों पर गंभीर दहेज उत्पीड़न और हत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है, जबकि दूसरी ओर ससुराल पक्ष इसे ड्रग्स की लत से जुड़ी आत्महत्या का मामला बता रहा है। इस पूरी गुत्थी को सुलझाने के लिए अब देश की शीर्ष अदालत ने भी मामले का कड़ा संज्ञान लिया है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई करते हुए स्पष्ट भरोसा दिलाया है कि इस मामले की जांच पूरी तरह निष्पक्ष, स्वतंत्र और किसी भी तरह के पूर्वाग्रह से रहित होगी। साथ ही कोर्ट ने दोनों पक्षों को मीडिया में अनावश्यक बयानबाजी से बचने की सख्त हिदायत दी है, ताकि जांच की प्रक्रिया बाधित न हो।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.

Don`t copy text!