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Anil Kumble Son: अनिल कुंबले के बेटे मायस ने पूरा किया 3 साल की उम्र का वादा, अमेरिका से बने इंजीनियर

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बेंगलुरु: किसी की पूरी उम्र बीत जाती है खुद को जानने-पहचानने में। यह समझने में ही सालों लग जाते हैं कि उसे जिंदगी में आखिरकार करना क्या है और बनना क्या है? वहीं कुछ गॉड गिफ्टेड बच्चे ऐसे भी होते हैं जो बचपन के शुरुआती दिनों में ही अपनी जिंदगी का असली मकसद ढूंढ़ लेते हैं। वे बहुत पहले ही यह तय कर लेते हैं कि उन्हें आगे चलकर भविष्य में क्या मुकाम हासिल करना है। भारत के दिग्गज लेग स्पिनर रहे अनिल कुंबले के बेटे मायस की कहानी भी कुछ ऐसी ही अद्भुत है। मायस कुंबले ने महज 3 साल की मासूम उम्र में ही यह पूरी तरह ठान लिया था कि उन्हें बड़ा होकर क्या बनना है। वे अपनी जिंदगी में आगे क्या करना चाहते हैं, अपने इस बड़े मकसद के बारे में उन्होंने तभी अपने माता-पिता को साफ-साफ बता दिया था। अनिल कुंबले और उनकी पत्नी चेतना कुंबले को तब तो अपने छोटे से बेटे की इन दावों भरी बातों पर पूरी तरह यकीन नहीं हुआ था, लेकिन आज जब बड़े होकर बेटे ने अपना वह वादा सच में पूरा कर दिखाया, तो दोनों माता-पिता गर्व से फूले नहीं समा रहे हैं।

🛠️ अनिल कुंबले के बेटे का बचपन से ही था बड़ा इरादा: मां चेतना कुंबले ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए बयां की दिल की बात

अनिल कुंबले के बेटे मायस को बचपन से ही एक काबिल इंजीनियर बनना था। यह बात 3 साल की छोटी और नासमझ उम्र में ही उन्होंने अपने दिमाग में न सिर्फ गहराई से बैठा ली थी, बल्कि अपने मम्मी-पापा को भी दृढ़ता के साथ बता दी थी। अपने इस जीवन के मुख्य मकसद को लेकर उनके बाल मन में कभी कोई संदेह या भटकाव नहीं रहा। अनिल कुंबले की पत्नी चेतना कुंबले ने अपने बेटे के इसी अटूट इरादे के बारे में उसके सफलतापूर्वक इंजीनियर बन जाने के बाद अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए दुनिया के साथ एक बेहद भावुक नोट साझा किया है।

🚗 ‘मैं कार डिजाइन करूंगा और नाम रखूंगा MAK’: 7 साल की उम्र में बड़े हुए सपने, बेटे ने माता-पिता का बढ़ाया मान

चेतना कुंबले ने अपनी पोस्ट में पुरानी यादों को ताजा करते हुए लिखा, “मैं इंजीनियर बनूंगा, वह उस अद्वितीय आत्मविश्वास के साथ कहता था जो केवल एक मासूम बच्चे में ही हो सकता है।” उन्होंने आगे लिखा कि 3 साल की उम्र में अपने छोटे-छोटे हाथों से वो घर में कोई न कोई औजार (टूल) उठा लेता और पूरे भरोसे से कहता था कि एक दिन वो दुनिया के लिए एक नया स्कूटर बनाएगा। जब मायस 7 साल का हुआ, तो उसके सपने और भी ज्यादा बड़े और व्यापक हो गए। अब वो खिलौनों के बजाय असल कारें डिजाइन करने की बड़ी-बड़ी बातें करता था। वो गर्व से कहता था कि वो जिस कार को डिजाइन करेगा, उसका नाम ‘MAK’ रखेगा। यहाँ ‘MAK’ से उसका सीधा मतलब ‘मायस अनिल कुंबले’ (Mayas Anil Kumble) से था।

🎓 पैरेंट्स के तौर पर बचपन के सपनों पर मुस्कुराते थे हम: दिल में एक मकसद लिए बेटे को ग्रैजुएट होते देखना जीवन का सबसे बड़ा सुख

अनिल कुंबले की पत्नी ने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि आम माता-पिता के तौर पर, हम भी बच्चों के इन मासूम बचपन के बड़े सपनों को सुनकर बस मुस्कुरा देते हैं। हम यही सोचते हैं कि पता नहीं आगे चलकर बच्चे का मन बदलेगा या आगे क्या होगा? लेकिन आज, जब उसे एक मुकम्मल इंजीनियर के रूप में कॉलेज से ग्रेजुएट होते देख रही हूँ, तो मुझे एक बेहद खूबसूरत बात का एहसास होता है; कभी-कभी बच्चे इस पूरी दुनिया से बहुत पहले ही खुद के बारे में यह अच्छी तरह जान लेते हैं कि वे वास्तव में क्या हैं और किस काम के लिए बने हैं। चेतना कुंबले ने कहा कि दिल में एक मजबूत मकसद लिए अपने बेटे को आज इंजीनियर बनते देखना मेरे पूरे जीवन के सबसे बड़े और वास्तविक सुखों में से एक है। मुझे उसकी इस अटूट मेहनत पर बहुत गर्व है। जिस नन्हे लड़के ने सालों पहले कहा था, “मैं इंजीनियर बनूंगा”, आज उसने अपना वह वादा पूरी तरह निभाया है।

🇺🇸 अमेरिका के इलिनॉय से हासिल की डिग्री: शैंपेन शहर से पूरी की अपनी इंजीनियरिंग की कठिन पढ़ाई

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अनिल कुंबले के बेटे मायस कुंबले ने खेल की दुनिया को न चुनकर तकनीकी क्षेत्र को चुना। उन्होंने दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में गिने जाने वाले अमेरिका के एक राज्य इलिनॉय के खूबसूरत शहर शैंपेन (Champaign, Illinois) में स्थित यूनिवर्सिटी से अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री आधिकारिक रूप से हासिल की है। इस दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए खुद अनिल कुंबले और उनकी पत्नी चेतना अमेरिका पहुंचे थे।

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