Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
"बाणेश्वर लोक" कार्य का श्रीगणेश,इंदौर विकास प्राधिकरण बनाएगा ऐतिहासिक धरोहर को अद्भुत,दर्शनीय। Bhilai Crime: भिलाई में सरकारी नौकरी के नाम पर 16 लाख की ठगी; फर्जी जॉइनिंग लेटर थमाकर बेरोजगारों को... Railway Station Redevelopment: अब एयरपोर्ट जैसा दिखेगा आपका रेलवे स्टेशन; हाई क्लास सुविधाओं से होगा... MP-CG Weather Update: गरियाबंद में मौसम का यू-टर्न! चिलचिलाती धूप के बीच जमकर बरसे ओले, सफेद रंग में... CGBSE Result 2026: दिव्यांग छात्रों ने रचा इतिहास! प्रदेश के इकलौते आवासीय ब्लाइंड स्कूल के सभी छात्... Bore Basi Diwas: अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर भूपेश बघेल ने खाया 'बोरे बासी'; सुशासन तिहार पर साधा ... Bhopal Crime News: भोपाल में बीटेक छात्र से घर में घुसकर लूट; मारपीट के बाद लैपटॉप और मोबाइल छीन ले ... Narsinghpur Bus Accident: इंदौर से सीधी जा रही बस नरसिंहपुर में पलटी; नीलगाय को बचाने के चक्कर में ह... Jabalpur Cruise Tragedy: आखिरी सांस तक ममता का पहरा! मलबे में बच्चे को सीने से लगाए मिली मां की लाश,... Political Crisis in MP: सीएम मोहन के आने से पहले ही मंत्री की रवानगी! एमपी कैबिनेट में नाराजगी की खब...

दिल्ली-NCR में आग का खतरा: ऊंची बिल्डिंग्स में ‘मौत का साया’, फायर विभाग के संसाधन नाकाफी; आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

5

गाजियाबाद/नोएडा: गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित ‘गौर ग्रीन एवेन्यू’ सोसाइटी में बुधवार सुबह लगी भीषण आग ने दिल्ली-एनसीआर के लाखों निवासियों को एक खौफनाक सवाल के सामने खड़ा कर दिया है। 9वीं मंजिल से शुरू हुई यह आग चंद पलों में 12वीं मंजिल तक पहुंच गई और 8 फ्लैटों को राख कर दिया। गनीमत रही कि समय रहते निकासी हो गई, लेकिन इस हादसे ने उस ‘सिस्टम की पोल’ खोल दी है, जो दावों के दम पर खड़ा है।

42 मीटर की क्रेन और 300 मीटर की बिल्डिंग

दिल्ली-एनसीआर में कंक्रीट के जंगल तो तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन उनसे निपटने की हमारी तैयारी ‘जमीन’ पर ही अटकी है। फायर विभाग के पास मौजूद हाइड्रोलिक क्रेन की अधिकतम ऊंचाई 42 मीटर (लगभग 14 मंजिल) है। जबकि हकीकत ये है कि नोएडा से लेकर गाजियाबाद तक 40 से 80 मंजिला इमारतें खड़ी हैं। जब आग 14वीं मंजिल से ऊपर लगती है, तो दमकल विभाग के पास उसे बुझाने के लिए प्रभावी संसाधनों का भारी अभाव है।

आंकड़ों में दिल्ली-NCR के फायर संसाधनों का सच

क्षेत्र सबसे ऊंची इमारत क्रेन की संख्या फायर स्टेशन फायर इंजन
नोएडा 307 मीटर (80 मंजिल) 4 9 28
गाजियाबाद 120 मीटर (40 मंजिल) 1 5 22
गुरुग्राम 201 मीटर (55 मंजिल) 1 7 58
दिल्ली 182.8 मीटर (52 मंजिल) 2 71 300

(नोट: यह स्थिति तब है जब आग को बुझाने वाली पाइप का पानी अधिकतम 20-25 मंजिल तक ही पहुंच पाता है।)

क्यों असुरक्षित हैं हम?

गौर ग्रीन हादसे के दौरान दमकल विभाग की पाइपें 9वीं-10वीं मंजिल तक ही मुश्किल से पहुँच पा रही थीं, जबकि आग 13वीं मंजिल तक विकराल रूप ले चुकी थी। दमकलकर्मियों का कहना है कि जब आग 20वीं मंजिल से ऊपर जाती है, तो उनके पास हाइड्रोलिक क्रेन न होने के कारण आग बुझाने का कोई सीधा रास्ता नहीं होता। ऐसे में केवल बिल्डिंग के अंदर लगे फायर फाइटिंग सिस्टम (SPRINKLER/HYDRANT) के भरोसे रहना पड़ता है, जिसके कई बार खराब होने की खबरें आती हैं।

बड़ा सवाल: आखिर कैसे बुझेगी बड़े टावरों की आग?

दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद के शहरी नियोजन (Urban Planning) में यह एक बड़ी चूक है। इमारतों को ऊंचाई (Vertical Growth) तो दे दी गई, लेकिन उस ऊंचाई पर सुरक्षा (Safety) का कवच नहीं दिया गया।

निष्कर्ष: गौर ग्रीन एवेन्यू की आग सिर्फ एक बिल्डिंग का हादसा नहीं, बल्कि एक वेक-अप कॉल (Wake-up call) है। यदि समय रहते फायर विभाग के संसाधनों को आधुनिक नहीं बनाया गया और गगनचुंबी इमारतों के सुरक्षा मानकों की ऑडिट नहीं हुई, तो आने वाले समय में यह ‘सुरक्षा का संकट’ और भी गहरा हो सकता है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.

Don`t copy text!