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IDA खुद भूमाफिया! एक भूखंड दो आवंटन दो रजिस्ट्रियां,पूर्व सीईओ चुग ने कराया पहला पंजीयन,तत्कालीन सीईओ के थे, जांच के आदेश,संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव ने आदेश किया फुर्र और गुम,आखिर ऐसा क्यों!

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IDA खुद भूमाफिया?, एक प्लॉट की दो रजिस्ट्रियां, दोनों को आवंटन भी,पूर्व सीईओ चुग ने की रजिस्ट्री,तत्कालीन सीईओ ने दिए टाइम लिमिट में जांच के आदेश,लेकिन EO यानी संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव गोल कर गए जांच,शाखा से उक्त भूखंड की एक फाइल गायब,एक के नाम भूखंड दूसरा लटक रहा।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर

सरकारी महकमा यूं तो नियमों का पालन करने के लिए होता हैं। लेकिन जब खुद सरकारी अमला ही नियमों का पालन नहीं करें और खुद ही भूमाफिया की भूमिका में नजर आए तो जनता फिर जाए तो फिर जाए कहां। दरअसल हां न्यूज विथ तड़का डॉट कॉम के पास कुछ ऐसे ही दस्तावेज हाथ लगे हैं।

जिन्हें देखकर आपको यकीन हो जाएगा कि खुद इंदौर विकास प्राधिकरण के जिम्मेदार ही भूमाफिया बन बैठे हैं। मनमाने तौर पर जो उन्हें पसंद आ रहा हैं। वो हो भी रहा हैं फिर जनता जाए भाड़ में। क्योंकि इंदौर विकास प्राधिकरण के पूर्व मुख्य कार्यपालिक अधिकारी रहे स्व चुग ने साल 1982 में इंदौर विकास प्राधिकरण की स्कीम नंबर 44 में एक भूखंड आवंटी को आवंटित किया था। और उसी भूखंड को इंदौर विकास प्राधिकरण के जिम्मेदारों ने, न सिर्फ दो बार आवंटित किया। वह भी दो दो अलग अलग लोगों को। बल्कि इंदौर विकास प्राधिकरण के जिम्मेदारों ने उसी भूखंड की दो दो रजिस्ट्रियां तक कर दी। फिलहाल हालात यह है कि उक्त भूखंड की आवंटी के पास साल 2025 के रिकॉर्ड में पंजीयन कार्यालय से सत्यापित प्रतिलिपि मौजूद हैं। लेकिन उक्त भूखंड से संबंधित संपदा शाखा,और लेखा शाखा के सारे रिकॉर्ड गायब हो गए हैं। या किसी ने कर दिए हैं।

अब तक उक्त भूखंड की यह कहानी।

आवंटी व्यक्ति जिसको इंदौर विकास प्राधिकरण की स्कीम 44 में एक भूखंड की रजिस्ट्री पूर्व सीईओ चुग ने की थी। जिसे लेकर फरियादी ने तत्कालीन सीईओ राम प्रकाश अहिरवार को इसकी शिकायत की थी। उसके भूखंड की पुनर्नपति की जाए। लिहाजा मामला पेचीदा समझते हुए तत्कालीन सीईओ राम प्रकाश अहिरवार ने उक्त मामले की जांच के आदेश संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव को दिए थे।

तत्कालीन सीईओ का आदेश ही फुर्र,शिकायती आवेदन है गायब।

तत्कालीन सीईओ राम प्रकाश अहिरवार ने दिनांक 3.09.2025 को संपदा शाखा प्रभारी मनीष श्रीवास्तव को उक्त मामले की समय सीमा में जांच करने के आदेश दिए थे। लेकिन संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव ने उक्त शिकायती आवेदन को ही न जाने कहां दबाकर रखा दिया है। क्योंकि अभी तक तत्कालीन सीईओ राम प्रकाश अहिरवार के समय सीमा में जांच आदेश को पूरा नहीं किया गया हैं। बल्कि बताया जा रहा है कि उनका आदेश ही गायब या रफा दफा कर दिया गया है।

न्यूज विथ तड़का डॉट कॉम के पास है उक्त भूखंड की दोनों रजिस्ट्रियों,और आवेदन प्रति और डिटेल।

दरअसल जिस स्कीम नंबर 44 के इस भूखंड के दो दो रजिस्ट्रियां का खुलासा न्यूज विथ तड़का डॉट कॉम कर रहा हैं। उसी भूखंड की दोनों रजिस्ट्रियां और तत्कालीन सीईओ राम प्रकाश अहिरवार का मार्क किया हुए आदेश की प्रति न्यूज विथ तड़का डॉट कॉम के पास मौजूद हैं। लिहाजा उक्त भूखंड में भूमाफिया बने जिम्मेदारों का सिलसिलेवार न्यूज विथ तड़का डॉट कॉम पोल खोल अभियान के तहत खुलासा करता रहेगा।

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