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IDA की संपदा शाखा से आम जनता परेशान,अधिकारी सुस्त,बाबुओं के भरोसे विभाग, दादागिरी से तंग आ चुकी जनता।

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इंदौर विकास प्राधिकरण का संपदा विभाग,सैकड़ों आम जनता परेशान,कर्मचारियों की दादागिरी,अधिकारी सुस्त।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर
इंदौर विकास प्राधिकरण की संपदा शाखा आज नहीं वर्षों से आम जनता की कमर तोड़,चप्पल घिसने और परेशानी की वजह साबित हुई हैं। दरअसल वह इसलिए क्योंकि संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव काफी ज्यादा सुस्त है और लगभग उक्त संपदा शाखा की बागडोर लगभग शाखा के कुछ चंद बाबुओं के भरोसे रहती हैं। जिसकी वजह से उन ऐसे बाबुओं की दादागिरी चरम पर हैं और आम जनता इनके अत्याचार झेलती रहती हैं। यह हम नहीं बल्कि यहां आने जाने वाले आम लोगों का कहना है कि कोई भी कार्य हो और संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव के पास वह जाते है तो संपदा शाखा प्रभारी श्रीवास्तव उन्हें बाबुओं के भरोसे भेज देते है। और ये बाबू जिनके पास स्कीम है वह महीनों तक चक्कर पर चक्कर कटवाते रहते हैं। लेकिन उनका काम होना लगभग बहुत बड़ी चुनौती साबित होती हैं।

हाल ही में रिटायर कर्मचारी की खोली थी पोल।

हाल में न्यूज विथ तड़का ने संपदा शाखा के 30 सितम्बर को रिटायर हो चुके बाबू कैलाश दवे का खुलासा किया था। जो रिटायर होने के बाद भी संपदा शाखा में उसी कुर्सी पर बैठ रहे हैं। जहां वह बैठे रहते थे। हालांकि खबर लिखते ही दवे यहां से गायब हो गए हैं। लेकिन वर्तमान में जो बाबू है उनकी दादागिरी चरम पर हैं। जिसका सामना यहां आने जाने वाले हर किसी को करना पड़ता हैं।

ये बाबू जिनके आगे शाखा प्रभारी भी नतमस्तक।

संपदा शाखा में आउटसोर्स कर्मचारी पंकज गुनारे,अजय बिल्लौरे, जितेंद्र साहू, गिरीश हलवे, दिलीप सिलावट, जैसे संपदा शाखा के बाबू है जिनकी वजह से आम जनता परेशान होती रहती हैं।

तत्कालीन सीईओ ने कस रखी से लगाम,लेकिन अब हालात बद्तर। 

तत्कालीन सीईओ राम प्रकाश अहिरवार ने संपदा अधिकारी और संपदा शाखा से जुड़े बाबुओं पर अपनी सख्त कार्यशैली के चलते लगाम कस रखी हैं लेकिन जैसे ही उनका तबादला जबलपुर हुआ वैसे ही संपदा शाखा के हालात जस के तस हो गए। 

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