शहर की यातायात व्यवस्था,बिगाड़ने में हमारा भी पूरा हाथ,सिर्फ जिम्मेदारों पर ठीकरा फोड़ना नहीं है समाधान,लेफ्ट टर्न,राइट टर्न और सीधे आने जाने वालों को करना होगा नियमों का पालन
जिम्मेदारों पर फूटता हमेशा ठीकरा,जबकि जनता भी उतनी ही जिम्मेदार।
शहर की यातायात व्यवस्था की बिगाड़ने में हमारा भी हाथ।
✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर
ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं को लेकर हमेशा से ही यातायात पुलिस,प्रशासन,सहित जिम्मेदारों पर ठीकरा फूटता आया हैं। लेकिन शहर की यातायात व्यवस्था को बिगाड़ने में कहीं न कहीं हमारा भी पूरा के पूरा हाथ हैं। दरअसल वह इसलिए क्योंकि शहर के प्रमुख चौराहों, यातायात सिंगनल पर आम तौर पर देखा गया हैं कि वाहन चालक लेफ्ट टर्न,राइट टर्न और सीधे जाने जैसे संकेतकों का पालन नियम कायदे के विपरीत ही करते हैं। किसी को सीधा जाना है तो वह वाहन चालक कहीं भी खड़ा हो जाता हैं। जबकि कई वाहन चालक तो ऐसे है जो लेफ्ट टर्न साइड को ही घेरकर खड़े हो जाते हैं। यहीं हालात राइट टर्न लेने वालों के साथ हैं। सभी दो और चार पहिया वाहन चलाने तो सिख जाते है। लेकिन नियम कायदे की जानकारी के मामलों में वह पूरी तरह शून्य साबित हो जाते हैं।

शहर के लेफ्ट टर्न जहां रहता है कब्ज़ा।
शहर का मालवा मिल चौराहे के लेफ्ट टर्न जहां कब्जा क़ायम हैं। इसी तरह पलासिया,महू नाका,गीताभवन, शिवाजी वाटिका,LIG,MIG,पाटनीपुरा,
परदेशीपुरा, जैसे और भी सैकड़ों चौराहे है जहां पर दुकानदारों का कब्ज़ा जमा हुआ हैं। लिहाजा ऐसे हालातों में वाहन चालक आपस में गुत्थम गुत्था हो जाते हैं।

नियम कायदों की जानकारी का अभाव या जानबूझकर तोड़ते है नियम।

इधर MG रोड,जवाहर मार्ग जैसे प्रमुख मार्गो पर देखा जाता है कि वाहन चालकों को जाना कहीं और रहता है और वह ट्रैफिक सिग्नल पर कहीं भी मनमानी जगह खड़े हो जाते हैं। जिसकी वजह से भी जाम जैसे हालात बन जाते हैं।
सबसे ज्यादा ई रिक्शा,दो पहिया निकाल रहे यातायात का दम।
शहर में संचालित ई रिक्शा, दो पहिया वाहन चालक यातायात का कचूमर बना रहे हैं। क्योंकि इनकी जहां इच्छा यह वहीं घुस जाते है तो कहीं से भी निकलने की कोशिशें करते रहते हैं।

ट्रैफिक पुलिस भी नाकाम
इधर इंदौर ट्रैफिक पुलिस भी वाहन चालकों को नियम कायदे सिखाने में नाकाम साबित हो रही हैं। क्योंकि पुलिसकर्मियों का ज्यादा ध्यान यातायात की बजाय चालानी कार्यवाही करने में रहता हैं।