महापौर इन एक्शन मोड, लापरवाहों की खोल रहे पोल,भोपाल तक पहुंचा मामला,अन्य निर्माण एजेंसियों में खलबली। मेयर के सवालों का जवाब नहीं किसी के पास।

✍️ अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर
महापौर पुष्यमित्र भार्गव निगम अमला हो या अन्य निर्माण एजेंसियां। उन्हें लेकर खासे नाराज हैं। क्योंकि इन अन्य एजेंसियों के चक्कर में मोहन सरकार से लेकर नगर निगम इंदौर और खुद मेयर की कार्यशैली पर सवाल दागे जा रहे हैं। जनता भी अन्य एजेंसियों की लापरवाहियों की वजह से नगर निगम को कोस रही हैं। लेकिन असल हकीकत अब इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव जनता को बताते हुए अन्य की पोल खोल रहे हैं। ताकि शहर की जनता इस बात से अवगत हो जाए कि नगर निगम का जो कार्य है,उसे लगभग पूरी ईमानदारी से किया जा रहा हैं। क्योंकि निर्माता एजेंसियों की वजह से शहर में जगह जगह रोड खुदे पड़े हैं। गड्ढे होना भी ऐसे निर्माण कार्यों की मुख्य वजह हैं। लिहाजा ऐसे हालातों में नगर निगम करेगा क्या। और अब महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने अन्य एजेंसियों को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया हैं। बात भोपाल तक भी पहुंच चुकी हैं। ताकि मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव सहित अन्य अधिकारी इस बात से वाकिफ हो सके कि दुर्दशा का कारण नगर निगम नहीं बल्कि अन्य एजेंसियां हैं। जिनकी वजह से नगर निगम बदनाम हैं।
पत्र ने खोली पोल।

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने चीफ सेकेट्री, प्रिंसिपल सेकेट्री को पत्र लिखा हैं। उक्त पत्र में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने जिस तरह सिलसिलेवार जानकारी दी हैं। वह साफ करता है कि अन्य निर्माण एजेंसियों की वजह से शहर के हालात बिगड़े हुए हैं। क्योंकि तय समय सीमा, और अन्य व्यवधानों की वजह से निर्माता एजेंसी समय पर कार्य ही नहीं कर पाई हैं।
निगम जनकार्य विभाग भी कुछ कम नहीं।

इधर उक्त निर्माण एजेंसियों की बात की जाए तो केवल इंदौर विकास प्राधिकरण ने खजराना स्थित गणेश ब्रिज और फूटी कोटी ब्रिज की सर्विस रोड को माकूल करने के लिए साढ़े नौ करोड़ निगम खजाने में जमा किए हैं। लेकिन उक्त कार्य को लेकर नगर निगम का जनकार्य विभाग अमला लेटलटिफी कर रहा हैं। और परेशानी जनता को हो रही हैं। यहीं नहीं इससे प्रदेश सरकार तक की बदनामी हो रही हैं।