मामला स्कीम 114 पार्ट एक का,भूखंड IDA का,गुंडों ने जमाया कब्ज़ा,बेखौफ सुबह से देर रात करवाई जा रही शराबखोरी। स्थानीय थाना पुलिस पर उठ रही उंगली।
प्लॉट IDA का,कथित लोग करवा रहे बेखौफ शराबखोरी, सुबह से लेकर देर रात तक छलकते ज़ाम,पुलिस आबकारी से मिली खुली छूट।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर
शहर की स्कीम नंबर 114 पार्ट एक का भूखंड क्रमांक H 1125 नई सड़क जो कि सरकारी रिकॉर्डों में है तो इंदौर विकास प्राधिकरण का। लेकिन उक्त भूखंड पर कथित लोगों का कब्ज़ा हैं। जो सुबह छह बजे से रात 2 बजे तक बेखौफ शराबखोरी करवा रहे हैं। जिन्हें स्थानीय पुलिस थाना लसुड़िया,इंदौर आबकारी की भी कोई फिकर नहीं हैं। उल्टे मानो ऐसा लगता है कि स्थानीय थाना पुलिस और आबकारी विभाग ने इन तथाकथित लोगों को खुलेआम शराब पिलाने की छूट दे रखी हो।

इधर खुलेआम हो रही इस शराबखोरी से स्थानीय रहवासी तंग आ चुके हैं। अगर वह इसकी शिकायत कहीं करते भी तो यह तथाकथित IDA के कब्जाधारी रहवासियों को धौंस देते हैं।
सुबह छह बजे से शुरू,देर रात दो बजे भी थमता दौर।
स्कीम नंबर 114 पार्ट एक नई सड़क के प्लॉट नंबर जो कि इंदौर विकास प्राधिकरण का है। उस पर सुबह छह बजे से रात 2 बजे तक शराबी बेखौफ आते हैं। और बिंदास कोई किसी जिम्मेदार विभाग के शराबखोरी करते रहते हैं।
पुलिस थाना लसुड़िया, उठ रहे सवाल।

दरअसल उक्त क्षेत्र लसुड़िया थाना क्षेत्र में आता हैं। लेकिन जिस तरह से उक्त स्कीम नंबर 114 नई सड़क पर लोगो के हौंसले बुलंद हैं। उसे लेकर अब स्थानीय लसुड़िया पुलिस थाना और उसके जिम्मेदारों की कार्यशैली कर सवाल उठाएं जा रहे हैं। क्योंकि बिना पुलिसिया संरक्षण के कोई भी इस तरह बेखौफ शराबखोरी करवा नहीं सकता हैं।
बिंदास लगवा दिए सोफे
इधर उक्त भूखंड पर कब्जा करते हुए इन कब्जाधारियों ने इंदौर विकास प्राधिकरण के भूखंड पर शराबखोरी करवाने के लिए सोफा सेट,कुर्सी टेबल लगा रखी हैं। जहां रातभर शराबखोरी होती रहती हैं।
भूखंड प्राधिकरण का।

इधर जिस भूखंड क्रमांक H 1125 स्कीम 114 पार्ट एक पर तथाकथित लोगों ने कब्जा जमाया है और बेखौफ काले धंधे किए जा रहे हैं। वह भूखंड रिकॉर्ड में इंदौर विकास प्राधिकरण का हैं।

रहवासियों का आरोप कोई सुनता नहीं,गुंडे धमकाते हैं।
इधर स्थानीय रहवासियों का कहना है कि उक्त कृत्य की शिकायत उन्होंने लसुड़िया थाना से लेकर सभी जिम्मेदार विभागों को की हैं। लेकिन कोई भी विभागीय अधिकारी इसे लेकर ठोस कार्यवाही करने से बचते हैं। इसके उलट इन कब्जाधारियों को इसकी जानकारी लगती हैं तो यह गुंडा तत्व उन्हें धमकाते है और मारपीट तक करने से नहीं डरते हैं।