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INDORE, स्मार्ट हक़ीकत,जमीन में उतरी नहीं केबलें,अफसरों की जालसाजी! स्मार्ट क्षेत्र, आसमान में लटकते तार,आमजनता के जी का जंजाल।

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इंदौर की ‘स्मार्ट’ हकीकत: जमीन पर उतरी नहीं केबलें, पर अफसरों की जालसाजी ने जनता के गले में डाला ‘जी का जंजाल’!


✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर।

सपने दिखाना तो कोई हमारे होनहार और दूरदर्शी अधिकारियों से सीखे! जब इंदौर में ‘स्मार्ट सिटी योजना’ की ढोल-नगाड़ों के साथ एंट्री हुई थी। तब बड़े-बड़े वादों की ऐसी कशिश थी कि, स्थानीय व्यापारी और रहवासी भी सम्मोहित हो गए थे। अफसरों ने फाइलें चमकाते हुए दावा किया था। अब इंदौर की सड़कें आसमान छूते केबल और तारों के मकड़जाल से मुक्त होंगी। सारी केबलें अंडरग्राउंड यानी पाताल में समा जाएंगी! लेकिन आज उसी ‘स्मार्ट सिटी’ क्षेत्र की सड़कों पर आप कभी भी निकलिए, तो समझ आयेगा कि अधिकारियों की ‘स्मार्टनेस’ सिर्फ कागजों और जनता की जेबें ढीली करने तक ही सीमित रहती हैं। क्योंकि हकीकत यह है कि जमीन के अंदर जाने वाली केबलें आज भी उसी तरह हवा में झूल रही हैं। जो अब आम जनता और व्यापारियों के लिए उनके ‘जी का जंजाल’ बन चुकी हैं।

ज़्यादा टैक्स की ‘सौगात’ और तोड़फोड़ का ‘पुरस्कार’

अधिकारियों ने व्यापारियों और रहवासियों को वीआईपी क्षेत्र कह ले या स्मार्ट शहर का ऐसा झुनझुना थमाया कि उन्होंने बाकी इलाकों से ज़्यादा टैक्स का भुगतान भी हँसते-हँसते कर दिया। लेकिन उन्हें बदले में मिला क्या? सिर्फ दुकानों और मकानों की अंधाधुंध तोड़फोड़ की ‘सौगात’। आज जब व्यापारी अपनी टूटी हुई चौखट पर खड़ा होकर ऊपर देखता है, तो स्मार्ट सिटी के नाम पर लटकती मनमानी अलग अलग केबलें अफसरों की इस तथाकथित ‘जालसाजी’ पर मुँह चिढ़ाती नज़र आती हैं।

शर्म से पानी-पानी जनता, इधर कुंभकर्णी नींद में अफसर!

स्मार्ट क्षेत्र का यह नज़ारा देखकर बाहर से आने वाले लोग भले ही शर्मा जाएं, उसे अनदेखा तक कर दे। लेकिन हमारे साहबान के चेहरे पर कभी भी शिकन तक नहीं है। जिन दावों के दम पर व्यापारियों के धंधे चौपट किए गए थे, वे दावे आज इन लटकते तारों की तरह बीच सड़क पर झूल रहे हैं। रहवासी और व्यापारी आज खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं, और अधिकारियों की इस कार्यशैली को कोसने पर मजबूर हैं। देखना यह है कि कागजी घोड़े दौड़ाने वाले ये अफसर कब इस जंजाल को हटाते हैं, या फिर ‘स्मार्ट’ के नाम पर यह कबाड़ ऐसे ही हवा में तैरता रहेगा!

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