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INDORE,भागीरथपुरा दूषित जलकांड,36 मौतों का कौन जिम्मेदार,600 पन्नो की सीलबंद रिपोर्ट में निगम अधिकारियों-जनप्रतिनिधियों की भूमिकाओं की बात!क्या पीड़ितों को मिलेगा इंसाफ?

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इंदौर भागीरथपुरा दूषित जल कांड,,,
हाईकोर्ट में 600 पन्नों की सीलबंद जांच रिपोर्ट, निगम अधिकारियों-जनप्रतिनिधियों पर उठ रहे सवाल, सवाल यह कि सार्वजनिक होगी रिपोर्ट ? फिर 36 मौतों के गुनहगारों को मिलेगी सज़ा?

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर।

देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के वार्ड क्रमांक 11 स्थित भागीरथपुरा क्षेत्र में हुए भीषण दूषित जल कांड को लेकर न्यायिक जांच रिपोर्ट आखिरकार मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ के समक्ष प्रस्तुत कर दी गई थी। रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता वाले एक सदस्यीय जांच आयोग ने 600 से अधिक पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में माननीय न्यायालय में सौंप दी थी। लिहाजा अब इस रिपोर्ट के आने के बाद इंदौर नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों, निगम सत्तारूढ़ दल से जुड़े नेता,जलकार्य समिति प्रभारी और स्थानीय नेताओं की जवाबदेही को लेकर कानूनी और राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं,क्योंकि अब उक्त रिपोर्ट के सार्वजनिक होने या नहीं होना माननीय न्यायालय पर विचाराधीन हैं। लेकिन उक्त पूरे मामले को लेकर एक पक्ष भागीरथपुरा रहवासी हैं। जिन्होंने एक बड़ी लापरवाही का खामियाजा भुगता हैं। इसीलिए अब भागीरथपुरा कांड रिपोर्ट आमजनता के बीच ज्वलंत मुद्दा बना हुआ हैं।

पूरा घटनाक्रम कब क्या हुआ?

दिसंबर 2025 – फरवरी 2026 त्रासदी की शुरुआत भागीरथपुरा इलाके में पीने के पानी की पाइपलाइन में सीवरेज का गंदा पानी मिलने के कारण अचानक उल्टी-दस्त और गैस्ट्रोएंटेराइटिस की महामारी फैल गई थी। इस दूषित पानी को पीने से 36 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी, और सैकड़ों लोग बीमार होकर अस्पतालों में भर्ती भी हुए थे।

जनवरी 2026 हाईकोर्ट का हस्तक्षेप।

लगातार मौतों और जनहित याचिकाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने सरकार की खिंचाई की और इसे राष्ट्रीय स्तर पर इंदौर की छवि को धक्का पहुँचाने वाली घटना बताया था। कोर्ट ने तुरंत प्रभावित क्षेत्रों में मुफ्त इलाज और टैंकरों से शुद्ध पानी सप्लाई करने के निर्देश भी दिए थे।

27 जनवरी 2026,जांच आयोग का गठन

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने स्वतंत्र न्यायिक जांच के लिए रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता के नेतृत्व में आयोग का गठन किया था। जिन्हें घटना के कारणों और प्रशासनिक लापरवाही की जांच का जिम्मा सौंपा गया था।

अगस्त 2026 रिपोर्ट पेश।

करीब 8 महीने की लंबी जांच के बाद आयोग ने नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और पीड़ितों के बयानों के आधार पर अपनी फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में पेश की।

जांच के दायरे में इंदौर नगर निगम अधिकारी और जनप्रतिनिधि?

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान जनता और विपक्ष के निशाने पर इंदौर नगर निगम का प्रशासनिक अमला और सत्तापक्ष के नेता रहे हैं।

इंदौर नगर निगम अधिकारी

तत्कालीन निगम कमिश्नर दिलीप यादव, तत्कालीन अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव सहित मैदानी अमले की भूमिका सीधे तौर पर जांच के घेरे में है। इन पर समय रहते शिकायतों को नजरअंदाज करने और पाइपलाइन टेंडरिंग और मॉनिटरिंग में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप लगे थे।

नगरीय प्रशासन मंत्री और मेयर।

इधर इस पूरे मामले में जांच रिपोर्ट को लेकर आमजनता से लेकर विपक्ष और खुद सत्ता पक्ष की दिलचस्पी इस बात पर है आखिरकार उक्त रिपोर्ट में इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक एक से विधायक और खुद नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय,और महापौर पुष्यमित्र भार्गव की क्या भूमिका बनाए जाने वाली हैं। क्या उक्त भागीरथपुरा जल कांड में इन दोनों ही जिम्मेदारों को लेकर सवाल उठाये जाएंगे।

जल कार्य समिति प्रभारी।

शहर की जल वितरण व्यवस्था और गुणवत्ता की सीधे तौर पर जिम्मेदारी संभालने वाली जल कार्य समिति के प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू पर जनता का भारी आक्रोश फूटा था। त्रासदी के दौरान पानी की टेस्टिंग और समानांतर चल रही सीवरेज-पेयजल लाइनों के रखरखाव में विफलता को लेकर उनकी जवाबदेही तय करने की मांग लगातार उठ रही है।

स्थानीय पार्षद कमल वाघेला

स्थानीय वार्ड पार्षद कमल वाघेला भी इस पूरे मामले में विवादों में रहे हैं। जहाँ एक तरफ घटना के दौरान उनके कुछ सोशल मीडिया वीडियो और तस्वीरों को लेकर जनता में नाराजगी देखी गई थीं। वहीं दूसरी तरफ पार्षद ने दावा किया था कि उन्होंने पिछले तीन सालों से गंदे पानी की समस्या को लेकर लिखित शिकायतें दी थीं। लेकिन निगम के अधिकारियों ने उस पर कोई एक्शन नहीं लिया था।

हाईकोर्ट में रिपोर्ट सार्वजनिक करने पर बहस

25 अगस्त 2026 को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने दलील दी कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फिलहाल रिपोर्ट को पूरी तरह सार्वजनिक करने के बजाय सुरक्षित रखा जाए ताकि मूल मुद्दे से ध्यान न भटके। कोर्ट ने फिलहाल रिपोर्ट को प्रिंसिपल रजिस्ट्रार के पास सुरक्षित रखते हुए इसे सार्वजनिक करने पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ कि इंदौर के 7 सरकारी अस्पतालों में से 5 के पानी के सैंपल फेल पाए गए हैं। जिनमें ई-कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया मिले हैं। इस मामले में नगर निगम को अब शहर की पूरी पेयजल व्यवस्था को लेकर जवाब देना होगा और अगली सुनवाई 8 सितंबर को तय की गई है।

सबसे बड़ा सवाल क्या दोषियों को मिलेगी सजा,और फरियादियों को न्याय।

भागीरथपुरा जल कांड की रिपोर्ट हाईकोर्ट में सुरक्षित हैं। फिलहाल इसके सार्वजनिक होने नहीं होने पर भी अभी कहा नहीं जा सकता हैं। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब आम जनता,भागीरथपुरा के फरियादी पक्ष,से लेकर विपक्षी दल कांग्रेस की निगाहें टिकी हुई हैं। इधर यह बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या दोषियों को सजा मिलेगी! या फिर और कुछ। लेकिन जैसे ही उक्त रिपोर्ट अगर सार्वजनिक हो जाती है तो इंदौर से लेकर देशभर में यकीनन बड़ा बवाल इंतजार कर रहा हैं।

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