INDORE, सोशल मीडिया पर वायरल सामान्य प्रशासन विभाग का पत्र,CPCT परीक्षा के झूठे आदेश! इधर IDA प्रशासनिक अधिकारी राजेंद्र पोरवाल की मिलीभगत या लापरवाही,जो बिना परीक्षा उतीर्ण किए दे दी मनमानी छूट।
सोशल मीडिया पर वायरल एक पत्र,जिसे कहा जा रहा है फर्जी,GAD सामान्य प्रशासन विभाग का बताया जा रहा हैं,इधर इंदौर विकास प्राधिकरण ने अनुकंपा वालों तो वर्षों से खुद ही दे रखी CPCT से छूट।

✍️ अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर।

फिलहाल सोशल मीडिया गलियारो में मध्यप्रदेश सामान्य प्रशासन विभाग का एक पत्र जमकर वायरल हो रहा हैं। जिसके तहत अब अनुकंपा नियुक्ति हासिल करने वालों को अनिवार्य सीपीसीटी परीक्षा की पात्रता से छूट दिए जाने का हवाला दिया गया हैं। दरअसल न्यूज WITH तड़का डॉट कॉम ने उक्त पत्र की प्राथमिक रूप से जांच की तो ये पत्र फर्जी साबित हो रहा हैं। क्योंकि इसमें जिन अधिकारी के हस्ताक्षर हैं। वो फिलहाल उक्त विभाग में पदस्थ ही नहीं हैं। जबकि सामान्य प्रशासन विभाग के सूत्रों की माने तो ऐसा कोई पत्र या आदेश विभाग ने जारी ही नहीं किया हैं। जबकि यह पत्र मात्र उन कर्मचारियों को गुमराह करने के लिए है जो अलग अलग विभागों में अनुकंपा नियुक्ति हासिल कर चुके हैं। खैर पत्र की सत्यता को लेकर अभी विभागीय जांच जारी हैं। लेकिन दूसरी तरफ इंदौर विकास प्राधिकरण ने तो ऐसे कोई से भी आदेश के बिना ही इंदौर विकास प्राधिकरण में कार्यरत अनुकंपा नियुक्ति हासिल करने वालों को सीपीसीटी परीक्षा से खुद ही छूट दे रखी हैं। इसका नतीजा यह है कि पिछले 7 सालों से IDA में ऐसे कर्मचारी पदस्थ है जिन्होंने सरकार के नियमानुसार अनुकंपा नियुक्ति तो ले ली हैं। लेकिन सालों गुजर जाने के बावजूद भी CPCT परीक्षा उतीर्ण नहीं की हैं।

7 से ज्यादा नियुक्ति,जिन्होंने नहीं की परीक्षा पास।
इंदौर विकास प्राधिकरण में ऐसे 7 से ज्यादा कर्मचारी हैं। जिन्होंने IDA से अनुकंपा नियुक्ति तो हासिल कर ली। लेकिन नियमानुसार अभी तक CPCT परीक्षा उतीर्ण नहीं की हैं। न ही कोई ऐसा सर्टिफिकेट इंदौर विकास प्राधिकरण को दिया हैं। जो नियमों का पालन कर सके।
प्रशासनिक अधिकारी की मिलीभगत,या लापरवाही।

सीपीसीटी परीक्षा उतीर्ण करने का नियम वर्षों से सरकार ने लागू कर रखा हैं। लेकिन इंदौर विकास प्राधिकरण के प्रशासनिक अधिकारी राजेंद्र पोरवाल की इस पूरे मामले में ऐसे अनुकंपा नियुक्ति वाले कर्मचारियों से मिलीभगत कहे या फिर उनकी घोर लापरवाही। क्योंकि शासन के नियमानुसार उन्होंने ऐसे अनुकंपा कर्मचारियों से सीपीसीटी परीक्षा उतीर्ण होने का प्रमाण वर्षों से नहीं लिया हैं। और खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।