INDORE, पशुपालन विभाग ,बेजुबानों के उपचार के नाम सरकार से लाखों की ठगी,भोपाल से FIR के आदेश,इंदौर में हुआ गुम,पशुपालन विभाग डॉक्टरों की तगड़ी सेटिंग,इंदौरी अधिकारी भी नतमस्तक।
बेजुबानों के उपचार के नाम पर सरकार से की ठगी,पशुपालन विभाग का अजब गजब मामला, भोपाल से निकला FIR दर्ज करने का आदेश,इंदौर में हुआ गुम,फर्जी उपस्थिति लगाने वाली डॉक्टरो की तगड़ी सेटिंग,जिम्मेदार का साथ और धूल खा रहा अवर सचिव का आदेश।


✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर।
न्यूज WITH तड़का डॉट कॉम ने पशुपालन विभाग की डॉक्टरों गोल्डी श्रीवास्तव और डॉक्टर मिताली मेहता,और पूनम त्रिपाठी के द्वारा सार्थक ऐप से फर्जी उपस्थिति लगाते हुए वेतन हड़पने,सरकार को आर्थिक चूना लगाने,और मूक पशुओं के उपचार के नाम पर फर्जीवाड़ा करने का खुलासा किया था।

लिहाजा उक्त मामले की पोल खुलने के बाद इस पूरे मामले की आग भोपाल तक पहुंची थी। और लगभग पूरा के पूरा पशुपालन विभाग की शंका के घेरे में आ गया था। ऐसे ही दर्जनों झोल के खुलासों के बाद मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने उक्त विभागीय मंत्री तक की रवानगी कर दी थी। और विभागीय जिम्मेदारियां भी अपने पास रख ली थी। लेकिन मंत्री को हटाने के बावजूद भी पशुपालन विभाग के ऐसे जालसाज,आर्थिक गबन करने वाले डॉक्टर कार्यवाही की जद से बाहर हैं। क्योंकि 24 अप्रैल 2026 को भोपाल से पशुपालन विभाग के अवर सचिव सुनील मड़ावी का जारी आदेश इंदौर तक ही नहीं पहुंचा। जब न्यूज WITH तड़का डॉट कॉम ने सूचना के अधिकार के तहत उक्त जानकारी भोपाल से मांगी गई तो यह गुमनाम पत्र RTI के तहत बाहर आ गया हैं। जिसमें अवर सचिव सुनील मड़ावी ने डॉक्टर मिताली मेहता और गोल्डी श्रीवास्तव पर FIR दर्ज करने तक के आदेश जारी कर दिए हैं।लेकिन इंदौरी अधिकारी जिनमें पशुपालन विभाग के संयुक्त संचालक विल्सन डाबर,सहित अपर कलेक्टर तक उक्त आदेश का पालन करने की बजाय उक्त आदेश को दबाकर बैठ गए हैं।

अवर सचिव के स्पष्ट निर्देश दर्ज हो FIR
पशुपालन विभाग के अपर सचिव सुनील मड़ावी ने 24 अप्रैल 2026 को जारी आदेश में डॉक्टर मिताली मेहता और डॉक्टर गोल्डी श्रीवास्तव पर आर्थिक गबन करने,सार्थक ऐप से झूठी हाजरी लगाने के चलते FIR करने के आदेश जारी किए थे। लेकिन यह आदेश इंदौर आते ही गुमनाम फाइल में दबा दिया हैं।

निजी क्लीनिक में ज्यादा रुचि।

मध्यप्रदेश सरकार ने पशुपालन विभाग की स्थापना इसलिए की थी कि बेज़ुबान जानवरों को सरकारी उचित उपचार और डॉक्टरों की सहायता मिल सके। लेकिन इसके उल्टे डॉक्टर मिताली मेहता और डॉक्टर गोल्डी श्रीवास्तव जैसे डॉक्टरों की रुचि अपने निजी क्लीनिक में बेजुबानों का उपचार करने की ज्यादा होती हैं। न कि सरकारी अस्पतालों में जहां उन्हें सरकार ने पदस्थ किया हैं। इसीलिए सार्थक ऐप के जरिए इतना बड़े कांड को अंजाम दिया गया था। लेकिन अभी भी सिस्टम सरकार और आदेश होने के बावजूद भी दोषी डॉक्टरों पर कार्यवाही करने की बजाय उन्हें संरक्षण दिया जा रहा हैं।