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INDORE, IDA भू अर्जन विभाग, बाबू की जमकर मनमानी,ईश्वर सिंह परमार और बेटे की जुगलबंदी से आमजनता परेशान,अफसरों का कहना स्टॉफ की कमी का फायदा उठाते है बाबू,फाइलों का लग रहा ढेर।

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इंदौर विकास प्राधिकरण,IDA के भू-अर्जन विभाग में बाबू की मनमानी चरम पर, ईश्वर सिंह परमार और बेटे की जुगलबंदी से जनता परेशान

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर

इंदौर विकास प्राधिकरण IDA का भू-अर्जन विभाग इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली और आंतरिक अव्यवस्था को लेकर सुर्खियों में है। विभाग में पदस्थ बाबू ईश्वर सिंह परमार और उनके बेटे पीयूष परमार पर मनमानी के गंभीर आरोप लग रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में इस पूरे विभाग के भीतर इस पिता-पुत्र की जुगलबंदी का सिक्का चल रहा है। और हालात यह है कि अफसर इन्हें कुछ ज्यादा कहे भी तो ये दोनों ही पिता पुत्र अपनी मर्जी से छुट्टी पर चले जाते हैं। लेकिन उन्हें जो काम करना करते वहीं हैं। बाकी कोई भी बोले इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता हैं।

बिना ‘वजन’-‘सेवा शुल्क’ कोई भी काम नहीं,लगा लेते है फाइलों का ढेर।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, भू-अर्जन विभाग में बिना किसी ‘वजन’ या ‘सेवा शुल्क’ के कोई भी फाइल आगे नहीं सरकती। और तो और खुद बाबू ईश्वर सिंह परमार खुलेआम वजन मांगते भी रहते हैं। उनका कहना है कि उन्हें किसी का भी खौफ नहीं है फिर वह। सीईओ ही क्यों न हो। या फिर भू अर्जन अधिकारी सुदीप मीणा। लिहाजा आम जनता का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर काम को जानबूझकर अटकाया जाता है। जब तक तय नजराना या सुविधा शुल्क नहीं मिल जाता हैं तब तक आवेदकों को केवल चक्कर कटवाए जाते हैं।

NOC से लेकर सामान्य कार्यों तक में अड़ंगा

इस भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा असर विभागीय स्वीकृतियों पर पड़ रहा है। चाहे किसी जमीन या प्रोजेक्ट की एनओसी (NOC) लेने का महत्वपूर्ण मामला हो, या फिर विभाग से जुड़ा कोई अन्य छोटा-बड़ा काम, हर स्तर पर अड़ंगेबाजी की जा रही है। केवल उन्हीं फाइलों को हरी झंडी दिखाई जा रही है, जहाँ लेनदेन की बात तय हो जाती है।

उच्च अधिकारी भी लाचार:
मजबूरी में झेल रहे हैं

हैरानी की बात यह है कि इस अव्यवस्था से खुद इंदौर विकास प्राधिकरण के भू-अर्जन अधिकारी सुदीप मीणा भी खासे परेशान हैं। उन्होंने अनौपचारिक चर्चाओं के दौरान उन्होंने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए कहा कि विभाग में इस समय कर्मचारियों की भारी कमी है। पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण ही मजबूरी में ईश्वर सिंह परमार जैसे कर्मचारियों से काम लेना पड़ रहा है।

सहकर्मी गए विदेश, एक महीने बाद सीधे होंगे रिटायर

विभाग के भीतर समीकरण बिगड़ने का एक कारण स्टाफ का अचानक कम होना भी है। विभाग के ही एक अन्य महत्वपूर्ण कर्मचारी संजय शर्मा इस समय देश से बाहर (आउट ऑफ इंडिया) यात्रा पर चले गए हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि वे वापस लौटकर ड्यूटी जॉइन नहीं करेंगे, बल्कि एक महीने बाद वहीं से सीधे सेवानिवृत्त (रिटायर) हो जाएंगे।

मजबूरी में मिला अतिरिक्त प्रभार, बढ़े हौसले

संजय शर्मा के अचानक विदेश जाने के कारण विभाग के सामने काम का संकट खड़ा हो गया। इसके चलते अधिकारियों को मजबूरी में संजय शर्मा के अधीन आने वाली सभी महत्वपूर्ण योजनाएं और फाइलें भी ईश्वर सिंह परमार को सौंपनी पड़ीं। इस अतिरिक्त प्रभार और नई योजनाओं का जिम्मा हाथ में आते ही बाबू और उनके बेटे की मनमानी तथा रसूख पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया हैं। इस पूरी उठापटक और सिंडिकेट के कारण इंदौर विकास प्राधिकरण के भू-अर्जन विभाग के जमीनी हालात बेहद दयनीय और चिंताजनक हो चुके हैं। शीर्ष अधिकारियों की लाचारी और एक ही कर्मचारी पर अत्यधिक निर्भरता के कारण पूरा सिस्टम पंगु नजर आ रहा है, जिससे न केवल आम जनता परेशान है बल्कि शासन की छवि भी खराब हो रही है।

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