Mandla Crime: मंडला में रिश्तों का कत्ल! पिता के साथ मिलकर बेटे ने की मां की हत्या, रोंगटे खड़े कर देगा मामला
मध्य प्रदेश के मण्डला से दिल दहला देने वाली वारदातें सामने आई हैं. जहां एक तरफ पति और बेटे ने मिलकर महिला की बेरहमी से हत्या कर दी, वहीं दूसरी ओर भाई ने ही भाई के शरीर के नौ टुकड़े कर दिए. रिश्तों की गरिमा को तार-तार करती इन घटनाओं ने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है.
कहते हैं कि एक घर की छत के नीचे मां और पत्नी सबसे सुरक्षित होती है, लेकिन मण्डला के निवास थाना अंतर्गत ग्राम घुरनेर में जो हुआ, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया है. 17 अप्रैल 2026 को पुलिस को सूचना मिली कि 45 वर्षीय तुलसा बाई का शव उनके ही घर में संदिग्ध हालत में पड़ा है. पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा के निर्देशन में जब जांच शुरू हुई, तो जो सच सामने आया वह रूह कंपा देने वाला था.
पति-पत्नी के बीच था विवाद
जांच में यह कड़वा सच सामने आया कि मृतिका का अपने पति चन्द्रिका प्रसाद से पिछले 15-20 वर्षों से विवाद चल रहा था. दोनों अलग-अलग रह रहे थे, लेकिन 15 अप्रैल की शाम पुरानी बातों ने फिर से तूल पकड़ लिया. विवाद इतना बढ़ा कि सगे बेटे मनोहर प्रसाद ने अपनी मां को जमीन पर पटक दिया. इसी बीच, पति ने आवेश में आकर पत्नी का गला घोंटा और पास रखे भारी पत्थर से उसके सिर व चेहरे को बुरी तरह कुचल दिया हत्या के बाद की क्रूरता और भी भयानक थी. आरोपियों ने ठंडे दिमाग से अपने खून से सने हाथ धोए, कपड़े बदले और साक्ष्यों को छिपाने की कोशिश की
वहीं बीते दिन मण्डला से ही एक और झकझोर देने वाली खबर आई थी, जहां एक भाई ने भाईचारे के रिश्ते को ही दफन कर दिया. यहां मामूली विवाद में बड़े भाई ने अपने ही छोटे भाई की हत्या कर उसके नौ टुकड़े कर दिए. इतना ही नहीं, पकड़े जाने के डर से उसने अंगों को सेप्टिक टैंक के गड्ढे में डाल दिया. और ईसके बाद परिजनों के साथ पुलिस थाना जाकर गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कर दी, लेकिन इस बात का खुलासा सेफ्टी टैंक से आने वाली दुर्गंध के कारण हुआ.
पुलिस ने आरोपी को भेजा जेल
मण्डला पुलिस ने अपनी सक्रियता से आरोपियों को सलाखों के पीछे तो भेज दिया, लेकिन समाज के टूटे हुए भरोसे की मरम्मत कौन करेगा. ये घटनाएं चेतावनी हैं कि अगर हमने अपने परिवारों के भीतर संवाद, प्रेम और एक-दूसरे के प्रति सम्मान को फिर से जीवित नहीं किया, तो भविष्य और भी भयावह हो सकता है.
देश में लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक ढांचे के गहरे संकट का संकेत हैं. बढ़ती असहिष्णुता, टूटता पारिवारिक संवाद और मानसिक तनाव ने रिश्तों की बुनियाद को कमजोर कर दिया है. जहां वर्षों पुराने विवाद भी हिंसा का रूप ले लेते हैं. जब अपने ही अपने के खिलाफ खड़े हो जाएं, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि समाज में संवेदनशीलता, धैर्य और आपसी समझ तेजी से घट रही है, और अब जरूरत केवल सख्त कानून की नहीं, बल्कि रिश्तों में भरोसा, संवाद और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को फिर से मजबूत करने की है.
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