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दावे है दावों का क्या! 450 MLD पानी फिर भी अनेक क्षेत्र बोरिंग,टैंकरों पर आश्रित। अब 900 मिलियन लीटर पानी, 2029 की लगा रहे आस,तीस तीस किलोमीटर तक भूमाफियाओं,कॉलोनाइजर का,शहर की ड्रेनेज लाइन अभी है पुरानी। ।

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दावे है दावों का क्या! 450 MLD पानी,फिर भी अनेक क्षेत्र बोरिंग टैंकरों पर आश्रित इंदौर, अब 900 MLD लाने की बात, लेकिन 2029 में जब तक आबादी के हिसाब से है क्या? बढ़ेगी ही जनता और क्षेत्र,भूमाफियाओं,
कॉलोनाइजरों ने शहर के चारों ओर,तीस तीस किलोमीटर तक से ज्यादा में बिछा रखा है टाउनशिप, बहुमंजिलाओ का जाल। 450 MLD में भी जमकर झोल, रास्तेभर चोरी होता नर्मदजल!

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर।

इंदौर नगर निगम 29 मार्च को 1356 करोड़ की एक नई योजना का श्रीगणेश मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के हाथों करवा रहा हैं। दरअसल नर्मदा के चौथे चरण का भूमिपूजन करवाने के दौरान दावे किए जा रहे है कि भविष्य के इंदौर तक ये पानी काम आएगा। लेकिन मसला यह कि वर्तमान में 450 से ज्यादा MLD पानी नर्मदा के तीन चरणों ,यशवंत सागर के पानी के बावजूद भी शहर को चारों ओर फैलाए जाने के चलते क्या ये दावे सार्थक होगें। शहर की अभी भी कई ड्रेनेज लाइन,सीवरेज लाइन, पुरानी हैं। आबादी बढ़ती का रही है। और दिलचस्प बात यह कि अभी भी इंदौर के कई क्षेत्र ऐसे है जहां नर्मदा जल की बजाय क्षेत्र बोरिंग,टैंकरों पर आश्रित हैं। नगर निगम के जिम्मेदारों का दावा है कि 2029 के बाद से इंदौर को 900 MLD करीब पानी मिलने लग जाएगा। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि नर्मदा के चरणों पर चरण के बावजूद भी इंदौर नगर निगम शहर की जलापूर्ति कभी भी माकूल तरीके से हो पाएगी। वर्तमान में आज भी शहर के दर्जनों इलाके है, जहां आज अभी नर्मदा के पहले से लेकर तीसरे चरण तक के कोई अतेपते नहीं हैं। लिहाजा यह क्षेत्र आज भी बोरिंग , टैंकर पर आश्रित हैं। खैर इस बात के लिए भूमाफिया,कॉलोनाइजर को श्रेय जाता है कि उन्होंने इंदौर के चारों और तीस तीस किलोमीटर तक कालोनियों,टाउनशिप,
बहुमंजिला, तान रखी हैं। खासतौर से गर्मियों में यहां ऐसे क्षेत्रों में जीना नर्क समान सा लगता है। अगर बोरिंग बंद हो जाएं। टैंकर समय पर खरीदने के बावजूद नहीं आए तो आम आदमी का जनजीवन अस्त व्यस्त हो जाता हैं।

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