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हेलमेट,,,औपचारिकता और मात्र फोटोबाजी,खुद नियम बताने वालों को ही नहीं अपनी जान का ख़्याल।

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हेलमेट मात्र औपचारिकताएं सिर्फ फोटोबाजी!
हकीकत यह कि खुद नियम बताने वालों को ही अपनी जान की नहीं हैं परवाह, करीब 70 प्रतिशत पुलिसकर्मी,सरकारी अमला हेलमेट को लेकर लापरवाह।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर

इंदौर पुलिस, जिलाधीश कार्यालय,इंदौर विकास प्राधिकरण,नगर निगम, हो या फिर अन्य कोई और विभाग इसमें कार्यरत कर्मचारी ही हेलमेट को लेकर खासे लापरवाह हैं। दरअसल फिलहाल हालात यह है कि रस्म अदायगी के बाद से ही इन ऐसे विभागों के कर्मचारियों को अपनी ही जान की परवाह नहीं हैं। क्योंकि न्यूज विथ तड़का डॉट कॉम ने किए एक सर्वे में ज़िंदगी के लिए जरूरी हेलमेट के प्रति खुद सरकारी अमले में ही उदासीनता देखी गई हैं। दरअसल लगभग 70 प्रतिशत से ज्यादा सरकारीकर्मचारी हेलमेट से कतराते है, तो चार पहिया वाहन चालक है जो सीट बेल्ट तक भी नहीं लगाते हैं।

पुलिस विभाग लगातार चला रहा अभियान,लेकिन सच्चाई कुछ ये।

दरअसल इंदौर पुलिस विभाग पिछले लंबे समय से हेलमेट को लेकर जागरूकता अभियान लगातार चला रहा है। पुलिस अधिकारियों द्वारा निशुल्क हेलमेट का वितरण भी किया जा चुका हैं। लेकिन खुद इंदौर पुलिस कर्मचारियों को न्यूज विथ तड़का डॉट कॉम ने बिना हेलमेट के ही दो पहिया दौड़ाते नजर आए हैं। लेकिन हां जरूर कुछ पुलिसकर्मी हेलमेट को लेकर जागरूक दिखे। मगर यह आंकड़ा 70 प्रतिशत से भी ज्यादा दिखा जिन पुलिसकर्मियों ने हेलमेट नहीं पहने थे।

अन्य विभागों में भी मात्र रस्म अदायगी।

इधर एक तरफ जहां इंदौर पुलिस लगातार हेमलेट को लेकर अभियान चला रही हैं। लेकिन अन्य दूसरे विभाग जिन्होंने एक समय तय किया था कि बिना हेलमेट विभागों में नो इंट्री के अपने ही फरमान भूल गए हैं। और हालात यह है कि अभी हेलमेट के बिना ही ऐसे विभागों में प्रवेश तक दिया जा रहा है। लिहाजा यह कहना गलत नहीं होगा कि हेलमेट को लेकर पूर्व किए गए सारे प्रयास केवल औपचारिकता और फोटोबाजी के सिवाय कुछ नही हैं। क्योंकि फोटोबाजी के बाद अब इन विभागों जिनमें कलेक्टर कार्यालय,इंदौर विकास प्राधिकरण,नगर निगम,जैसे अन्य कई और सरकारी विभाग है जहां हेलमेट को लेकर कोई पूछाताछी नहीं हैं। बस दिन दिन पर फोटोबाजी की जाती है और आखिर में मामला फुस्स।

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