इंदौर नगर निगम ,IDA में कर्मचारियों के टोटे,नगरीय प्रशासन विभाग के बदतर हालात,कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षाओं के बाद योग्य उम्मीदवार वर्षों तक करते रहते प्रतीक्षा।
इंदौर नगर निगम,IDA नगरीय प्रशासन विभाग के बुरे हालात,योग्य इंजीनियर देख रहे सालों से रास्ता,कर्मचारी चयन मंडल में रुके पड़े क्वालीफाइड युवा इंजीनियर,लेकिन नहीं हो रही नियुक्तियां।

- ✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में हुई 20 मौतों ने मध्यप्रदेश की मोहन सरकार और नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों की नींदें उड़ा दी हैं। क्योंकि वर्षों जारी दर्जनों लापरवाहियों को उक्त हादसे ने उजागर कर दिया हैं। इधर सरकार कर्जा लेकर मुफ्त रेवड़ियां बांटने में लगी रही है, और तकनीकी रूप से सक्षम इंजीनियर कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षाओं के बावजूद मात्र इंतजार ही कर रहे हैं।

और तो और ये संख्या दो पांच दस नहीं बल्कि सैकड़ों में हैं। जो परीक्षा में क्वालीफाइल्ड होने के बावजूद अपनी नियुक्तियों का रास्ते देख रहे हैं। इधर इंदौर विकास प्राधिकरण में भी इंदौर नगर निगम जैसे ही हालात है क्योंकि IDA अमला भी हर महीने रिटायर हो रहा हैं। लेकिन नई नियुक्तियों की बात की जाए तो सरकार इंदौर विकास प्राधिकरण में नए योग्य युवाओं को यहां नियुक्त करने के बिल्कुल भी मन में नहीं हैं। लिहाजा रोजाना किसी न किसी कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने की स्थिति में इंदौर विकास प्राधिकरण खाली होता जा रहा हैं। और अगर सरकार का रुख ऐसा ही रहा तो अगले तीन सालों में इंदौर विकास प्राधिकरण में दो प्रतिशत कर्मचारी ही शेष रहेंगे।
नगर निगम को जरूरत लेकिन जिम्मेदार जागरूक नहीं।

भोपाल से इंदौर पहुंचे अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, इंदौर प्रभारी अपर सचिव नगरीय प्रशासन अनुपम राजन ने इंदौर नगर निगम जिम्मेदारों से बैठक करते हुए निर्देश दिए है कि नगर निगम में रिक्त पदों पर जल्द से जल्द नियुक्तियां की जाएं। लेकिन नगर निगम में ये हालात सिर्फ भागीरथपुरा हादसे के दौरान नहीं हुए हैं। बल्कि वर्षों से नगर निगम को कर्मचारियों की दरकार रही हैं।

लेकिन पूर्व निगमायुक्त हो या अन्य जिम्मेदार अधिकारी उन्होंने इन कमियों को पूरा करने की कभी सोची ही नहीं।
कर्मचारी चयन मंडल सिर्फ लेता रहता परीक्षा,फिर शुरू होती प्रतीक्षा।

इधर प्रदेश के नगरीय प्रशासन विभाग के अंतर्गत आने वाले नगर निगम,नगरीय निकायों में योग्य इंजीनियर की काफी ज्यादा कमी हैं। यह किसी से छुपा नहीं हैं। लेकिन मध्यप्रदेश कर्मचारी मंडल हर वर्ष परीक्षाएं तो लेता हैं। लेकिन रिजल्ट आने के बावजूद चयनित और योग्य उम्मीदवारों की प्रतीक्षा शुरू हो जाती हैं। ऐसे युवा प्रतिभागी वर्षों तक इंतजार करते रहते हैं। लेकिन उनकी बारी आने में एडी चोटी का जोर लगाना पड़ता हैं।
IDA में कर्मचारियों का टोटा।

यही इंदौर नगर निगम जैसे हालात इंदौर विकास प्राधिकरण के भी है। जहां लगभग हर माह इंदौर विकास प्राधिकरण का कर्मचारी या अधिकारी सेवानिवृत्त हो रहा हैं। लगातार रिटायरमेंट होने चलते इंदौर विकास प्राधिकरण खाली होता जा रहा हैं। और अगर यही हालात रहते है तो 2027 तक IDA में मात्र पांच प्रतिशत अमला ही शेष बचेगा।