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IDA की संपदा शाखा को जनता कहती नर्क,बाबुओं को यमदूत,वहीं संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव का मूल विभाग राजस्व,फिर भी नियम कायदों को ताक पर रख दस सालों से IDA की खा रहे मलाई।

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इंदौर विकास प्राधिकरण संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव का है राजस्व मूल विभाग,फिर भी पिछले दस सालों से IDA और इंदौर में ही जमे,प्रतिनियुक्ति पर पदस्थापना,खुद इंदौर विकास प्राधिकरण नहीं भेज रहा शासन को असल जानकारी। 

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर 

इंदौर विकास प्राधिकरण की संपदा शाखा में पिछले लगभग 10 सालों से संपदा अधिकारी बनकर जमे हुए मनीष श्रीवास्तव का मूल राजस्व विभाग हैं। और श्रीवास्तव नायब तहसीलदार के पद पर पदस्थ। लेकिन फिर भी इंदौर विकास प्राधिकरण में वह पिछले दस सालों से जमे हुए हैं। हा जरूर इन दस सालों में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते चंद महीनों के लिए तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह ने उन्हें निर्वाचन कार्यालय में अटैक किया था। लेकिन बतौर IDA के संपदा अधिकारी के तौर पर मनीष श्रीवास्तव का कार्यकाल काफी ज्यादा लंबा रहा। और दिलचस्प बात यह है कि मनीष श्रीवास्तव को लेकर खुद इंदौर विकास प्राधिकरण के जिम्मेदारों ने ही चुप्पी साधे रखी। क्योंकि उन्होंने राजस्व विभाग से प्रतिनियुक्ति पर आए मनीष श्रीवास्तव की जानकारी राज्य शासन को देने की जहमत तक नहीं उठाई। लिहाजा इतने सालों से मनीष श्रीवास्तव इंदौर विकास प्राधिकरण की संपदा शाखा में जमे हुए हैं। 

आखिर श्रीवास्तव के लिए नियम अलग क्यों? 

राज्य शासन और राजस्व विभाग  की पॉलिसी है कि संबंधित अधिकारी किसी भी जिले में तीन वर्ष से ज्यादा का कार्यकाल नहीं कर सकता हैं। वह एक ही कुर्सी पर तीन सालों से ज्यादा एक ही कुर्सी पर जमा नहीं रह सकता हैं। लेकिन इंदौर विकास प्राधिकरण के संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव ऐसे अधिकारी है जिन्होंने तमाम नियम कायदों को ताक पर रखते हुए अपने कार्यकाल का इतना लंबा सफर IDA में ही पूरा कर लिया। लेकिन खुद इंदौर विकास प्राधिकरण के जिम्मेदारों को इसकी जानकारी नहीं रही और न ही उन्होंने शासन को मनीष श्रीवास्तव के संबंधित जानकारी देना उचित समझा। 

संपदा शाखा के हाल बेहाल।

इधर पिछले दस वर्षों में इंदौर विकास प्राधिकरण की संपदा शाखा के हालात बद से बदतर हो गए हैं। यहां आने जाने वाली आम जनता इंदौर विकास प्राधिकरण की संपदा शाखा को नरक कहते हैं और यहां मौजूदा बाबुओं को यमदूत। क्योंकि इन बाबुओं और खुद संपदा शाखा प्रभारी श्रीवास्तव को आम जनता की पड़ी नहीं हैं। बल्कि जनता को चक्कर पर चक्कर कटवाने के अलावा यह कुछ नहीं करते हैं। 

बाबू खुद करते है दलाली। 

सूत्रों का कहना है कि संपदा शाखा के बाबू हो या संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव। इनके शहर के अलग अलग दलालों से सीधे संपर्क भी हैं। वहीं इन दलालों को संपदा शाखा प्रभारी श्रीवास्तव के केबिन में बिंदास बैठे देखा भी जा सकता हैं।

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