मामला चंदन नगर नामकरण का, नप रहे छुटभैये निगम अधिकारी। अपर आयुक्त सहित अन्य जिम्मेदार बेगुनाह क्यों???

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर
चंदन नगर नामकरण मामले में जांच और अब सिर्फ और सिर्फ रस्म अदायगी के चलते जिन्हें नपना था, वो खास हो गए हैं। और जो छोटे से मोहरे थे वो गुनहगार बन गए हैं। दरअसल अगर पूर्व विधायक और मंत्री पुत्र आकाश विजयवर्गीय चंदन नगर नामकरण मामले में जिम्मेदारों का रुख इस और नहीं करते तो यह भी नहीं होता। लेकिन सवाल बार बार बस यही मन घर कर रहा है कि जिस तरह से जांच समिति ने जांच की। क्या वह जांच वाकई में जांच है या फिर सिर्फ गुनहगारों को बचाने की मात्र साजिश। क्योंकि जो खबरें निकल कर आ रही है उसे देखते हुए जांच करने में ही जमकर झोल हो गया हैं। गुनहगार मासूम और अदने का जुर्म साबित हो गया हैं।
अपर आयुक्त नरेंद्रनाथ पांडे को किसकी शह।

चंदन नगर मामले में महापौर पुष्यमित्र भार्गव अपर आयुक्त नरेंद्रनाथ पांडे पर जमकर बिरफे थे। क्योंकि उक्त विभाग की जिम्मेदारी ही अपर आयुक्त नरेंद्रनाथ पांडे के हाथों थी। लेकिन फिर भी अपर आयुक्त नरेंद्रनाथ पांडे को जांच रिपोर्ट में निर्दोष साबित होना। अब नगर निगम की कार्यशैली पर सवालिया निशान उठा रहा हैं।
देवलासे और गुप्ता सहित अन्य पर रडार।
चंदन नगर नामकरण मामले में जिस तरह से अदने अधिकारियों पर शंका की सुई रुक जाना और अपर आयुक्त नरेंद्रनाथ पांडे पर से निकल जाना। कई सवालात खड़े कर रहा है। अब सवाल यह है कि अपर आयुक्त होते हुए नरेंद्रनाथ पांडे को कोई संज्ञान नहीं था। या संज्ञान होते हुए भी अब कोई जानकारी नहीं हैं। बात सीधे तौर पर अदने की इतनी ताकत नहीं जो अपने से बढ़ो के होते हुए कोई कृत्य कर लेवे।
आखिर अपर आयुक्त पर किसका सर पर हाथ।

चंदन नगर नामकरण मामले का खुलासा होते ही सबसे पहले अपर आयुक्त नरेंद्रनाथ पांडे दायरे में आए थे। लेकिन फिर भी जांच समिति द्वारा उन्हें बक्श देना अब खुद जांच समिति पर सवाल खड़े कर रही हैं।