मामला इंदौर कांग्रेस जिलाध्यक्ष का,
सदाशिव की पूरी ताकत रिपीट हो जाएं,इधर मुकाबला रीना बौरासी और मोतीसिंह के बीच।
✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार

इंदौर।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष को लेकर घमासान जारी हैं। दावेदार अलग अलग कयासों के बीच अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ जिलाध्यक्ष रहे सदाशिव यादव भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के दम पर वापस रिपीट होने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। लेकिन जिलाध्यक्ष के लिए मुकाबला मोतीसिंह पटेल और रीना बौरासी के बीच माना जा रहा हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि जिलाध्यक्ष के लिए रीना बौरासी बाजी मार गई हैं। और इस बार कांग्रेस इंदौर जिले के लिए महिला अध्यक्ष पर अपना दांव लगा सकती हैं। हालांकि होगा क्या यह जल्द ही साफ होने वाला हैं। बताया जाता है कि पार्टी अब एकसाथ सभी जिलाध्यक्षों की घोषणा करने वाली हैं।
जातिगत समीकरण आ रहे हैं आड़े।
सूत्रों की माने तो कांग्रेस जिलाध्यक्ष को लेकर जातिगत समीकरण आड़े आ रहे हैं। क्योंकि पार्टी का एक धड़ा मोतीसिंह के साथ है तो वहीं दूसरी तरफ रीना बौरासी को लेकर कई कांग्रेसी उम्मीद लगा रहे है कि इस बार पार्टी शहर में या जिले में महिला अध्यक्ष की नियुक्ति करेंगी ही। जिसमें रीना बौरासी सभी उम्मीदों पर खरी उतर रही हैं। लिहाजा कहा जा सकता है कि रीना ही अगली जिलाध्यक्ष होगी।
सदाशिव का कार्यकाल कोई खास नहीं।
इधर सदाशिव यादव के कार्यकाल की बात की जाए तो उनके कार्यकाल में पार्टी ने कोई खास उपलब्धि हासिल नहीं की। बल्कि ग्रामीण सीटे भी कांग्रेस हार गई हैं। जिनमें देपालपुर,सांवेर, महू प्रमुख हैं। लिहाजा सदाशिव यादव के वापस रिपीट होने की संभावनाएं काफी कम है। क्योंकि यादव पर कई बार आरोप भी लग चुके हैं। सदाशिव यादव महू और जीतू पटवारी के ईद गिर्द ही घूमते रहे। लेकिन उन्होंने जिलाध्यक्ष रहते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में कोई खास कार्य और उपलब्धि कांग्रेस को नहीं दिलवाई।