अमानक प्लास्टिक कैरी बैग,
महीने में एक कार्यवाही और निगम अमले की इतिश्री।
अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार।

इंदौर।
नगर निगम अमले द्वारा सांप भी मर जाए और लाठी ना टूटे ऐसी कहावत को चरितार्थ किया जा रहा हैं। दरअसल,वह इसलिए क्योंकि क्योंकि प्लास्टिक पॉलीथिन बैग की ही बात की जाए तो महीने में एक दो कार्यवाही कुछ एक लाख का जुर्माना और इंदौर नगर निगम का अमला महीनेभर फ्री फ्री फ्री फ्री,
जी हां दरअसल यह इसीलिए कहा जा सकता हैं। क्योंकि नगर निगम अमले पता है अमानक प्लास्टिक कैरी,पोलीथीन कहा पाई जाती हैं। हर महीने कुछ चुनिंदा स्थानों पर आनन फानन में दो तीन स्पॉट फाइन बनाया। लिया दिया और बात खत्म,नियम गए चूल्हे में।
यहां मिलती हैं पॉलीथिन, जिससे शहरभर में बेखौफ खपती है
शहर का ट्रांसपोर्ट नगर,सियागंज,सिंधी कॉलोनी,,राजवाड़ा,यह शहर के प्रमुख गढ़ हैं। जहां हमेशा से अमानक प्लास्टिक कैरी,पॉलीथिन उपलब्ध रहती हैं। निगम अमला पिछले तीन वर्षों से इन्हीं स्थानों पर महीने की दो तीन स्पॉट फाइन कार्यवाही करता आया हैं। लेकिन निगम की ही, रस्म अदायगी के चलते इस वक्त झोलाधारी इंदौर दोबारा पॉलीथिन वाला बन गया हैं। खैर इस विषय में हम से ज़्यादा जिम्मेदारों की जिम्मेदारी बनती हैं।
महापौर,कमिश्नर,पूरा अमला जान या अनजान?
जिस तरह से शहर में इस वक्त पॉलीथिन खप रही हैं। बेख़ौफ़ कहीं भी मिल रही हैं। उपलब्ध हैं। इसकी जानकारी शहर के प्रथम नागरिक महापौर पुष्य मित्र भार्गव को न हो यह सोचने वाला विषय हैं। इधर देश के सबसे स्वच्छ शहर के कमिश्नर शिवम वर्मा को भी न हो यह उससे बड़ा सवाल हैं।
सिर्फ दिखावा,और पकड़ में आता गरीब।
हमेशा जब भी अमानक प्लास्टिक कैरी बैग का मुद्दा उठता है तो निगम जोनल कार्यालय का पीली गैंग का अमला निकल जाता हैं। रस्म अदायगी शुरू होती गरीब छोटे व्यापारियों पर। लेकिन जो आशीर्वाद लेकर खुलेआम प्लास्टिक कैरी बैग बेच रहा हैं। वह ऐसा बड़ा मास्टरमाइंड कभी भी अमले या अन्य किसी की न नजर में आता हैं। न ही पकड़ में आता हैं।
प्रावधान तमाम,लेकिन कुएं में घुली भांग।
केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार तक ने अमानक प्लास्टिक कैरी बैग को लेकर कायदे कानून बनाए हैं। लेकिन पर्यावरण की दुहाई देने वाले ही उक्त नियम कायदों को फॉलो नहीं करवा पाते हैं।क्योंकि ध्यान और कहीं है न।