कलेक्टर की चेतावनी के बावजूद भूल जाता राजस्व अमला, या फिर अमले को नहीं कोई लोड।
राजस्व प्रकरण निपटान में पिछड़ा इंदौर,
अब चेतावनी नहीं कार्यवाही की दरकार,,,,

अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार।
इंदौर।
क्योंकि यह असल सच्चाई है कि पिछले 31 मई 2024 के प्रकरणों का नहीं हो रहा निपटान। दरअसल वह इसलिए क्योंकि राजस्व प्रकरण में पटवारी,तहसीलदार,आरआई,और निजी कंसल्टेंट की मिलीभगत,लापरवाहियों की वजह से अभी भी डेढ़ साल से ज्यादा के राजस्व प्रकरण, जिनमें नामांतरण,सीमांकन, बंटाकण, फील्ड बुक, ऑनलाइन टर्मिम जैसी अहम प्रक्रिया में दर्जनों लापरवाहियां,आर्थिक रूप से स्वयं का हित साधने,के चलते राजस्व प्रकरण अटके पड़े है। जबकि कई ऐसे प्रकरणों को अमले ने अभी तक हाथ नहीं लगाया है।
असल सच्चाई यह
कलेक्टर आशीष सिंह की चेतावनी के बावजूद भी राजस्व अमला कोई लोड नहीं लेता हैं। दरअसल वह इसलिए क्योंकि अभी भी सैकड़ों प्रकरण लंबित हैं। जिनमें पटवारी, तहसीलदार,आरआई और कंसल्टेंट की भूमिका प्रमुख हैं।
यह करते है खेल,अधिकारी हो रहे गुमराह।
सरकार और प्रशासन ने किसी भी राजस्व प्रकरण निपटान की समय सीमा एक महीना निर्धारित की है। लेकिन एक कई महीने गुजरने के बावजूद भी यह प्रकरण निपटते नहीं हैं। बल्कि पटवारी तहसीलदार और आर आई की जादूगरी के चलते संबंधित हितग्राही से महीना गुजरने के बाद नया आवेदन लगवा दिया जाता है। SDM,ADM,और खुद कलेक्टर गुमराह हो जाए। उनके सामने सालों से लंबित प्रकरणों की हकीकत पहुंच नहीं पाए।
इसकी वजह से हो रहा सरकार को राजस्व का नुकसान
दरअसल कलेक्टर कार्यालय से संबंधित प्रकरणों में हो रही देरी की वजह से इसके आगे के राजस्व वसूली के कार्य जैसे TNCP ,IDA NOC, नगर निगम से नक्शा, जैसे कार्य रुके पड़े हैं। जिसकी वजह से कहीं न कहीं सरकार का ही राजस्व का नुकसान हो रहा हैं।