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UP Panchayat Chunav: यूपी में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म, लेकिन योगी सरकार का बड़ा फैसला— प्रधान ही बनेंगे प्रशासक

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में ग्रामीण स्थानीय शासन को लेकर एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। प्रदेश में ग्राम प्रधानों का निर्धारित कार्यकाल आज यानी 25 मई को आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है, लेकिन इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों और पंचायती राज व्यवस्था में उनकी मुख्य भूमिका पहले की तरह ही मजबूत बनी रहेगी। दरअसल, उत्तर प्रदेश पंचायती राज विभाग (UP Panchayati Raj Department) द्वारा भेजे गए एक विशेष नीतिगत प्रस्ताव को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। इस नए प्रस्ताव के तहत, कार्यकाल खत्म होने के बाद भी मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही उनके संबंधित गांवों में ‘प्रशासक’ (Administrator) के रूप में नया काम सौंपा जाएगा। इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल के संबंध में सोमवार देर शाम तक पंचायती राज निदेशालय द्वारा आधिकारिक शासनादेश (आदेश) जारी होने की पूरी संभावना है।

🤝 उत्तर प्रदेश के इतिहास में पहली बार लागू होगी यह व्यवस्था: एडीओ पंचायत या सचिव के बजाय प्रधानों के पास ही रहेंगे वित्तीय अधिकार

उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक इतिहास में यह पहला मौका होगा, जब नियमित कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम पंचायतों में एक विशेष ‘प्रशासक समिति’ (Administrator Committee) का गठन किया जा रहा है। अब तक की स्थापित व्यवस्था के अनुसार, जब भी ऐसी परिस्थितियां बनती थीं, तब गांवों के एडीओ पंचायत (ADO Panchayat) या ग्राम विकास सचिव (VDO) को सरकार द्वारा गांवों का सरकारी प्रशासक नियुक्त किया जाता था। ऐसी स्थिति में निवर्तमान प्रधानों के सभी वित्तीय, चेकिंग और प्रशासनिक अधिकार पूरी तरह से समाप्त कर दिए जाते थे। लेकिन इस बार आगामी राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए योगी सरकार ने एक बिल्कुल अलग और जनहितैषी व्यवस्था अपनाई है, जिसके तहत पूर्व ग्राम प्रधान ही प्रशासक के रूप में गांव की पूरी विकास व्यवस्था संभालते रहेंगे।

🗳️ ओबीसी आरक्षण विवाद के चलते समय पर नहीं हो सके त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव: अब 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद ही मतदान की उम्मीद

दरअसल, तकनीकी और कानूनी अड़चनों के कारण राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (UP Panchayat Elections) समय पर संपन्न नहीं हो सके हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण को लेकर उत्पन्न हुई कानूनी स्थिति स्पष्ट न होने की वजह से पूरी चुनाव प्रक्रिया लंबी अवधि के लिए टल गई थी। अब शासन द्वारा नए ओबीसी आयोग के गठन किए जाने के बाद भी वार्डों के नए सिरे से परिसीमन और मतदाता सूची के पुनरीक्षण जैसी आवश्यक तैयारियों में कम से कम छह महीने से अधिक का समय लगने का प्रशासनिक अनुमान है। ऐसे में राजनैतिक गलियारों में पुख्ता कयास लगाए जा रहे हैं कि अब ये पंचायत चुनाव 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के ठीक बाद ही कराए जाएंगे।

🏗️ गांवों में विकास कार्य न रुकें इसलिए 26 मई से पहले नियुक्त होंगे प्रशासक: लखनऊ में प्रधानों के विरोध प्रदर्शन का दिखा असर

इसी लंबी अवधि और चुनावी देरी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने समय रहते तय किया है कि 26 मई से पहले ही सभी ग्राम पंचायतों में नए प्रशासकों की वैधानिक नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर दी जाए, ताकि उत्तर प्रदेश के गांवों में चल

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