MP Crime Report: मध्य प्रदेश में महिला एवं बाल अपराधों की कड़वी हकीकत; क्या दावों के बीच सुरक्षित है ‘देश का दिल’?
नई दिल्ली: किसी भी राज्य की चौतरफा तरक्की और विकास का असली पैमाना केवल वहां की ऊंची इमारतें, चमचमाते एक्सप्रेस-वे, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर या भारी-भरकम औद्योगिक निवेश ही नहीं होता। असल मायने में किसी राज्य की प्रगति इससे भी तय होती है कि वहां रहने वाली महिलाएं, बहन-बेटियां और मासूम बच्चे कितने सुरक्षित और भयमुक्त माहौल में जी रहे हैं। मध्य प्रदेश, जिसे अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के कारण ‘देश का दिल’ कहा जाता है, मौजूदा समय में एक गंभीर सामाजिक और सुरक्षा संकट से जूझ रहा है। सरकार द्वारा कानून-व्यवस्था को लेकर किए जाने वाले तमाम दावों और महिला सशक्तिकरण की बड़ी-बड़ी लोक-कल्याणकारी योजनाओं के बीच एक कड़वी हकीकत यह भी है कि राज्य में महिलाएं और मासूम बच्चे लगातार जघन्य अपराधों का शिकार हो रहे हैं।
📊 एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़े बयां कर रहे कड़वी हकीकत: महिला व बाल अपराधों के मामले में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल मध्य प्रदेश
यह विशेष खोजी रिपोर्ट मध्य प्रदेश में महिला एवं बाल अपराधों की वर्तमान जमीनी स्थिति, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) व राज्य पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों, अपराधों के पीछे छिपे गहरे सामाजिक-प्रशासनिक कारणों और इसके संभावित व्यावहारिक समाधानों पर पूरी तरह आधारित है।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के हालिया आंकड़े और राज्य पुलिस के आंतरिक दस्तावेज एक ऐसी भयावह हकीकत बयां करते हैं, जिसे किसी भी सभ्य समाज या प्रशासन के लिए नजरअंदाज करना पूरी तरह नामुमकिन है। महिलाओं के खिलाफ होने वाले कुल संज्ञेय अपराधों के ग्राफ को देखें, तो मध्य प्रदेश देश के शीर्ष प्रभावित राज्यों की सूची में शुमार है। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी और कड़े कानूनों के चलते कुछ विशिष्ट श्रेणियों के अपराधों में मामूली कमी जरूर दर्ज की गई है, लेकिन इसके बावजूद महिलाओं, बुजुर्गों और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के खिलाफ होने वाले अपराध अब भी राज्य के माथे पर एक गंभीर चिंता और आत्ममंथन का विषय बने हुए हैं।